Saturday, November 26, 2016

नोट बंद करने के लिए तीन तर्क

यह पोस्ट  तर्कहीन और विवेकहीन  भक्तो के  लिए  नहीं है .....


नोट  बंद  करने  के लिए  तीन  तर्क  दिए  जा  रहे  हैं, पहला  अर्थव्यवस्था रेगुलेटेड हो ,  दूसरा काला  धन  बाहर आएगा  और कला धन  वालों  को  पकड़ा  जायेगा और  तीसरा नकली नोट चलन से बाहर किये जांय ! अगर  यह  तीन  बातें  हो  तो  इसको  पूरा  समर्थन  |

 लेकिन ५०० और १००० के  नोट  बंद करने के फैसले  पर  कुछ  ज़रूरी बात  जिनपर  विचार  होना  चाहिए  :-

1.१०० से  कम  बड़े  कॉर्पोरेट घरानों (ख़रब  पतियों ) पर  बैंक का १२ लाख  करोड़ क़र्ज़  है, यह  हम  सब  जानते हैं की यह  पैसा किसी  सरकार , मंत्री या बैंक की  अपनी सम्पति  नहीं है  , यह  आम जानता की  गाढ़ी कमाई का  पैसा है  , जिसका  व्याज एक लाख चौदह हज़ार  करोड़  इस  साल  बजट  में  माफ़    कर  दिया  गया  | अगर सच में मोदी  जी को आम  जनता के  हित  में काले  धन  की  चिंता  है  तो क्यों  यह   व्याज  माफ़  किया जा रहा है क्यों  यह  क़र्ज़  नहीं  वसूला जा  रहा  है ?

2.यह  पूरा  अभियान  विदेशों से  काला धन न  ला  पाने  , सबके खाते  में  १५ लाख  का  वादा  पूरा  न  कर  पाने  की नाकामी को छुपाने  का  प्रयास  है | वे जो  ब्लैकमनी होल्डर हैं (असली / बड़े वाले ) उनपर कार्यवाही तो दूर आप सुप्रीम  कोर्ट तक के पूछने पर  उन लोगों के नाम  उजागर नहीं  करते | येही  है  आपका  साहस  |

3 अब  यहाँ  विचार  कीजिये  की  यह  खेल  आखिर है  क्या ? १२ लाख  करोड़  बैंक   का  corporates  के पास फंसा है, और  उन corporates के हितों की रखवाली  मोदी सरकार  द्वारा  उसका व्याज भी  माफ़ कर दिया  जा  रहा है | अब  पूँजी  के इस बढ़ते  संकट से  निपटने  के लिए बहुत  ज़रूरी  है की किसान ,मजदूर , खोमचे वाले ,  पटरी दुकानदार , तीसरी चौथी श्रेणी का कर्मचारी आम  महिलायों  और मध्यम वर्ग  के  पास रखे  पैसे को  बैंक  में एक झटके  में  जमा  कराया  जाये जिससे बैंक के पास  फिर  से  पूँजी  एकत्र  हो  और  सरकार  फिर  corporates  को  कर्ज  दिलवा सके |

4. सबसे  ख़राब स्थिति  यह  है कि करीब पाँच करोड़  लोग खुद और परिवार की बेहद ज़रूरी ज़रूरतों (दवा सब्ज़ी आटा चाय  दूसरी खुदरा चीज़ों)के लिये बेवजह सताये गय हैं । वे भोर से बैंकों, पोस्ट आफिसों की लाइनों में खड़े  रहे  । अपने ही  कमरतोड़ मेहनत से कमाए अपने पैसे को  अपने ऊपर खर्च करने  के  लिए  भीख  की तरह  लेने के लिए  ! इनमें से शायद ही कोई वो हो जिसको पकड़ने के लिये ये नोटबंदी की स्कीम लाई गई है | कितने  मजदूर , पटरी दुकानदारों  के  यहाँ  चूल्हा  तक  नहीं  जला  उसकी ज़िम्मेदारी  कोन लेगा ?

5. नोट्बंदी के  लिए ज़ारी किये  गए  तुगलकी सरकारी  आदेश में  यह  भी  शर्त लगायी  है  की अगर किसी  के  खाते  में  अगर  आज  से  लेकर  ३० दिसम्बर तक  २.५ लाख  से ज्यादा पैसा  जमा हुआ तो वोह जांच के  घेरे  में  आएगा  और उस पर  दो सौ परसेंट पेनालिटी  लगायी  जाएगी  | अच्छा  मजाक  है  मेहनत  से  इमानदारी  से  सचाई  से  अगर पैसा कमाया  है और उसमे से  अपना पेट काटकर  ( जो  प्राय: आम किसान  और  मजदूर परिवारों और निम्न मध्य वर्ग  में  होता  रहा  है )  पाँच सात , १० लाख जोड़ ले, या पत्नियों  द्वारा  सालों  साल पतियों  से  मिलने  वाले  घर  खर्च में  से  बचा कर  जो  पूँजी आज   एकत्र की  हो वोह काला धन  हो  जाएगी ? सबको  पता  है  काला धन  कोई नकद  में  नहीं  रखता होगा |

ऊपर लिखी  सारी मुसीबत  अगर  आम  जानता झेल  भी लेती  है  तब भी  सवाल  वोही  रहेगा  की  क्यों ? और  किसलिए ? इससे आम जनता  को  क्या  मिलेगा ? महगाईं  कम  होगी  ? आमदनी  बढ़ेगी  ? खाते  में  १५ लाख  आएगा  ? शिक्षा , खेती  , चिकित्षा में  सब्सिडी मिलेगी या  मुफ्त  हो  जायेगा  ?
या  आम  जनता को  भूखा मार  कर , परेशान  करके  बड़े कॉर्पोरेट घरानों  के   हितों  की रक्षा  की जाएगी जिनके  टुकड़े  खाकर  यह  सरकार  बनी  है  तो  अब नमक  का  हक़  तो  अदा करना  ही  है ।

सोचियेगा अवश्य l

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