Friday, January 1, 2016

चमार मूलत बौद्ध है-ओशो



चमार मूलत बौद्ध है-ओशो
यह जान कर तुम हैरान
होओगे कि चमार मूलत:
बौद्ध हैं! जब भारत से
बौद्ध धर्म उखाड़ डाला
गया और बौद्ध भिक्षुओं
को जिंदा जलाया गया
और बौद्ध दार्शनिकों को
खदेड़ कर देश के बाहर कर
दिया गया, तो एक
लिहाज से तो यह अच्छा
हुआ। क्योंकि इसी कारण
पूरा एशिया बौद्ध हुआ।
कभी—कभी दुर्भाग्य में
भी सौभाग्य छिपा होता
है।


जैन नहीं फैल सके क्योंकि
जैनों ने समझौते कर लिए।
बच गए, लेकिन क्या
बचना! आज कुल तीस—
पैंतीस लाख की संख्या
है।

 Chamar Troops
पांच हजार साल के
इतिहास में तीस—पैंतीस
लाख की संख्या कोई
संख्या होती है! बच तो
गए, किसी तरह अपने को
बचा लिया, मगर बचाने में
सब गंवा दिया।



बौद्धों ने समझौता नहीं
किया, उखड़ गए। टूट गए,
मगर झुके नहीं। और उसका
फायदा हुआ। फायदा यह
हुआ कि सारा एशिया
बौद्ध हो गया। क्योंकि
जहां भी बौद्ध—
दार्शनिक और मनीषी
गए, वहीं उनकी प्रकाश
—किरणें फैलीं, वहीं
उनका रस बहा, वहीं लोग
तृप्त हुए। चीन,
कोरिया…… दूर—दूर तक
बौद्ध धर्म फैलता चला
गया। इसका श्रेय हिंदू
पंडितों को है।

जो भाग सकते थे भाग गए।
भागने के लिए सुविधा
चाहिए, धन चाहिए। जो
नहीं भाग सकते
थे— इतने दीन थे, इतने
दरिद्र थे— वे हिंदू
जमात में सम्मिलित हो
गए। लेकिन हिंदू जमात में
अगर सम्मिलित होओ तो
सिर्फ शूद्रों में ही
सम्मिलित हो सकते हो।
ब्राह्मण तो जन्म से
ब्राह्मण होता है, और
क्षत्रिय भी जन्म से
क्षत्रिय होता है, और
वैश्य भी। सिर्फ अगर
किसी को हिंदू धर्म में
सम्मिलित होना है तो
एक ही जगह रह जाती
है
— शूद्र, अछूत। वह असल में
हिंदू धर्म के बाहर ही है,
मंदिर के बाहर ही है। हो
जाओ शूद्र अगर बचना है
तो।
तो जो बौद्ध बच गए और
नहीं भाग सके और
मजबूरी
में सम्मिलित होना पड़ा
हिंदू धर्म में, वे ही बौद्ध
चमार हैं, वे ही बौद्ध
चमार हो गए। और क्यों
चमार हो गए? एक कारण।
कभी किसी ने सोचा
भी न
होगा बुद्ध के समय में कि
यह कारण इतना बड़ा
परिणाम लाएगा।
जिंदगी बड़ी रहस्यपूर्ण
है।-
ओशो (रैदाशवाणी.मन हि पुजा मन हि
धूप)



आरक्षण बहुत सही गणित है



साथियो,
आरक्षण 
बहुत सही गणित है 
जरा ध्यान दे हमारे गणित पर । 
वैसे तो मेरी गणित बहुत कमजोर रही है पर फिर भी मैं अपनी बात आप लोगों तक गणित के माध्यम से ही पहुंचाना चाहता हूं।।
माना कि 100 व्यक्ति हैं।।
और इन 100 व्यक्तियों कोे खाने के लिए 100 रोटियां हैं।।
वर्तमान में पिछड़ी जाति OBC के 60 व्यक्तियों को खाने के लिए 27 रोटियों की व्यवस्था है।।
इसी तरह अनुसूचित जाति SC व जनजाति ST के 25 व्यक्तियों के एक समूह के लिए 22.5 रोटियों की व्यवस्था है।।
अब सामान्य वर्ग के तकरीबन 15 आदमियों के लिए 50 रोटियां शेष बचती हैं।
पर समस्या ये है कि सामान्य वर्ग GENERAL के 15 आदमियों में से 3% ब्राम्हण जाति के आदमी बेहद शक्तिशाली हैं जो शेष बची 50 रोटियों में से लगभग 45 रोटियां खा जा रहे हैं।
अब समस्या ये है कि सामान्य वर्ग के 12 आदमियों के लिए मुश्किल से सिर्फ 5 रोटियां ही मिल पा रहीं है।


इसी कारण सामान्य जाति के जाट, मराठा, लिंगायत, पटेल या पाटीदार अपने लिए ओबीसी OBC की 27 रोटियों में हिस्सेदारी मांग रहे हैं।
अब समस्या ये है कि ओबीसी OBC के 60 लोग वैसे ही सिर्फ 27 रोटियों पर गुजारा करके अपनी जिंदगी चला रहे हैं ऐसे में वो जाट, मराठा और लिंगायत में अपने हिस्से की 27 रोटियां बांटने को हरगिज तैयार नही हैं।।
इस समस्या का एक ही समाधान है कि कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई 50% आरक्षण की सीमा रेखा को लांघा जाऐ और जाट, मराठा, और लिंगायत के साथ साथ सभी जातियों को उनकी संख्या के अनुपात में शिक्षा & नौकरियों में आरक्षण दिया जाऐ।।
अब 60 लोगों के हिस्से की 27 रोटियों पर झपट्टा मारने से बात नही बनेगी ।। जरूरत इस बात की है कि सारी पिछड़ी जाति OBC के लोग और जाट, गूजर , अहीर , यादव , गडरिया , सुनार, लोहार , कुम्हार , कश्यप , निसाद , कुशवाहा , सैनी माली , मराठा, लिंगायत, पटेल आदि एक मंच पर आऐं और उन 3% ब्राम्हण लोगों से अपना हिस्सा छीने जो सिर्फ 3% होकर 45 रोटियां तोड़े जा रहे हैं।।
अगर ये ब्राह्मण जाति के 3 लोग सिर्फ 3 रोटी खाकर जीना सीख ले तो समाज मे कोई भी भूखा नहीं रहेगा।।


अच्छा लगे तो हर ग्रुप में, SC/ST व पिछड़ा वर्ग OBC के प्रत्येक कॉन्टेक्ट पर कई बार रिपीट करो । सभी में जागरूकता पैदा करने का अभियान चलाओ । 
जय मुलनिवासी .....जय भारत।।

इंडियन करेंसी नोट पर बौद्धकालीन अशोक स्तंभ ही होना चाहिए



Dilip C Mandal · 
इंडियन करेंसी नोट पर बौद्धकालीन अशोक स्तंभ ही होना चाहिए. और कुछ नहीं. आजादी के बाद राष्ट्रीय सहमति से ऐसा ही था.
कांग्रेस ने खुराफात करके इसमें गांधी की तस्वीर लगाकर गड़बड़ी की शुरुआत की.
अब बीजेपी इसमें घुसेगी तो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बहाने, लेकिन बाद में अपने सारे सड़े-गले नेताओं, प्रतीकों को ले आएगी. हेडगेवार से लेकर गोलवलकर और अशोक सिंघल तक, पता नहीं कैसे कैसे नमूने होंगे...इन्हें रास्ता मिल गया तो पूरी गंदगी मचा देंगे.
बीजेपी की नीयत साफ है तो यह नोटिफिकेशन लाए कि सिर्फ बाबा साहेब. लेकिन वह, घालमेल किए बिना रह नहीं सकती.
फिर कोई अगली सरकार अपने हिसाब से कुछ को खारिज करेगी, और अपनी पसंद के नए चेहरे करेंसी पर ले आएगी. अंतहीन विवादों का सिलसिला चल पड़ेगा.
प्रश्न यह है कि क्या इस देश को और नए नए विवादों की जरूरत है?
इसलिए, करेंसी नोट पर अशोक स्तंभ के अलावा कुछ नहीं!

भारत की सवर्ण जातियों की खोजे जिनसे इन्होने विश्व में देश का नाम रोशन किया हुआ है

भारत की सवर्ण जातियों ( ब्राह्मण, बनिया, और ठाकुर) की शिकायत है कि आरक्षण की वजह से देश का विकास रुक गया है |
आरक्षण से पहले इन लोगो ने बहुत आविष्कार और खोजे की थी जो कि इस संसार में अन्य कहीं मिलना नामुमकिन है |

 आइए जानते है इनकी ऐसी ही कुछ खोजो और अविष्कारों के बारे में 
जिनसे इन्होने विश्व में देश का नाम रोशन किया हुआ है ---

१. इनकी सबसे महत्त्वपूर्ण खोज वर्ण व्यवस्था और जातियों की खोज थी | इन्होने मनुष्यों को 6743 से अधिक जातियों में बाँट दिया | इतनी अधिक जातियों की खोज करना क्या कोई आसान काम है ?
सोचिये बेचारों को इतनी अधिक जातियों को खोजने में कितना अधिक परिश्रम करना पड़ा होगा |

२. इनकी दूसरी महत्वपूर्ण खोज ३३ करोड़ देवी-देवताओं की खोज है | ये खोज इन्होने उस समय की, जब देश की कुल आबादी भी ३३ करोड़ नहीं थी|

सोचिये !!

इतने सारे देवी देवताओ की खोज में बेचारों को कितना पसीना बहाना पड़ा होगा ?
अजी रात दिन एक कर दिए होंगे बेचारों ने |

३. आज चाहे वैज्ञानिक अभी तक दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश नहीं कर पाए लेकिन ये लोग बहुत पहले ही ऐसे दो लोकों की तलाश कर चुके हैं जहाँ पर जीवनमौजूद है और वो ग्रह
 हैं --

स्वर्ग लोक जहाँ पर अलौकिक शक्तियों के स्वामी देवता निवास करते हैं और नरक लोक |

३. विश्व के देशों ने चाहे कभी भी परमाणु बम,हाइड्रोजन बम जैसे विनाशकारी बमों का निर्माण किया हो लेकिन ये उससे बहुत पहले ही ऐसे ऐसे अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण कर चुके थे जो पूरी सृष्टि का विनाश करने में सक्षम थे | इन्होने उसको नाम दिया ब्रह्मास्त्र |

इन्होने आज तक किसी आक्रमणकारी शत्रुओं के खिलाफ उसका प्रयोग क्यों नहीं किया ये अलग शोध का विषय है| 
बाहर से कुछ सौ हजारों की संख्या में आक्रमणकारी आते रहे और इनको ३३ करोड़ शस्त्रधारी देवताओं के साथ धूल चटाते रहे ये अलग बात है |

४. वैज्ञानिक बेशक आज तक मनुष्य की उम्र बढ़ाने और उसको अजर, अमर बनाने की औषधि नहीं खोज पाए हो लेकिन ये अब से कई युगों पहले मनुष्य को अमरता का रसास्वादन करवा चुके है ये अलग बात है इनके द्वारा अमर किये गए अश्वत्थामा जैसे मानव कभी भी देखने को नहीं मिलते हैं |

५. बेशक विश्व में कभी भी आकाशवाणी का प्रसारण भारत मे बाद में हुआ लेकिन ये उससे बहुत पहले ऐसी व्यवस्था का निर्माण कर चुके थे जिससे किसी युद्ध का आँखों देखा हाल बिना किसी भी कैमरा जैसे यंत्र की मदद के दिव्यदृष्टि के द्वारा किया जा सकता था लेकिन उसके बाद में उसका प्रयोग इन्होने क्यों नहीं किया ये अलग एक विचारणीय प्रश्न है. 

६. विश्व का कोई भी देश आज तक सूर्य पर नहीं पहुँच सका है लेकिन ये अबसे पहले सूर्य पर होकर आ चुके हैं।

७. सूर्य को फल की तरह खाया भी जा सकता है ये भी अकेली इनकी ही खोज थी |

८. बेशक राईट बंधुओ को हवाई जहाज के अविष्कार के निर्माण के श्रेय दिया जाता हो लेकिन ये उससे बहुत पहले ही पुष्पक विमान का निर्माण कर चुके थे | उसके बाद इनकी वायुयान निर्माण कला को क्या हुआ ये आज तक रहस्य है |

९. संजीवनी बूटी जैसी चमत्कारिक औषधि भी इन्हीं की खोज थी जिससे किसी भी मृत मनुष्य को जीवित किया जा सकता था लेकिन आज वो औषधि कहाँ हैं ये इनको भी आज तक नहीं पता है |

१०.आज बेशक देश में सूखा पड़ता हो और और लोग पानी को तरसते हो लेकिन ये अब से युगों पहले आकाश में तीर मारकर बारिश करवा सकते थे आज ये उसका प्रयोग क्यों नहीं करते ये भी एक रहस्य है।

११. एक गर्दन पर दस-दस तक सिर और एक कंधे पर हजारों हाथ उग सकते हैं ये भी इनकी ही बुद्धिमता की खोज है |

१२. समुन्द्र यात्रा से मनुष्य गल जाता है ये भी इनकी ही महत्वपूर्ण खोज है |

१३. पशु पक्षियों में भी मानवीय संवेदना होती है और वो भी मानव की भाषा बोल और समझ सकते हैं ये भी इनकी ही खोज है |

१४. मानव क्लोन बनाने की कला में तो ये सिद्धहस्त थे| अगर किसी मनुष्य के रक्त की बूंदे धरती पर पड़ जाती थी तो जितनी बूंदे धरती पर पड़ती थी उसके उतने ही क्लोन पैदा हो जाते थे |

१५. मानव रक्त भी कोल्ड ड्रिंक और चाय की तरह पिया जा सकता है ये भी इनकी ही महत्त्वपूर्ण खोज थी |

१६. बच्चे बिना औरत मर्द के पैदा भी किये जा सकते है ये भी इनकी ही खोज थी |
ये मानव शिशु छींक कर, 
सेब को खाकर,
खीर पीकर,
शरीर के पसीने द्वारा,
पशु पक्षियो के गर्भ द्वारा भी पैदा करवा सकते थे |

१७. वानर-रीछ जैसे जीव भी बिना पंखो के उड़ सकते हैं ये भी इनकी ही खोज थी |

१८. एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के स्पर्श से, उसकी छाया से भी भ्रष्ट हो सकता है ये भी इनकी ही खोज थी |

१९. पशु भी मानव
(ST/SC/OBC)
से ज्यादा शुद्ध और पवित्र होता है ये भी इनकी ही खोज थी|

२०. मानव जो
(SC/ST/OBC) हैं उनके स्पर्श से भ्रष्ट हुआ मनुष्य पशुओं का मूत्र पीकर, या मूत्र छिड़ककर पवित्र हो सकता है ये भी इन्ही की खोज थी |

२१. स्त्री और शूद्र दोयम दर्जे के नागरिक है इनकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती | इनके कोई अधिकार नहीं होते | इनको अपनी इच्छा के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है ये भी इन्ही की खोज थी |

२२. पूजा-अर्चना और हवन के द्वारा भी बारिश करवाई और रोकी जा सकती है ये भी इन्ही की खोज थी |

२३. अगर किसी स्त्री को एक ही पुरुष में उपयुक्त पति नहीं मिलता है तो वो पांच या उससे अधिक भी आदमियों को अपने पतियों के रूप में स्वीकार कर सकती है ये भी इन्ही की खोज थी|

२४. माता एक औरत को पांच भाइयो के बीच में किसी वस्तु की तरह बाँट सकती है ये भी इन्ही की खोज थी |

२५. अगर किसी औरत का गर्भपात हो जाता है तो उसका भ्रूण नष्ट होने से बचाया जा सकता है और उस भ्रूण को सौ टुकडो में बांटकर सौ या उससे अधिक संताने पैदा की जा सकती हैं ये भी इनकी ही खोजथी |

२६. मानव और जानवर के सिर आपस में बदले जा सकते हैं ये भी इनकी ही खोज थी |

२७. मानव और हाथी का रक्त ग्रुप एक होता है ये भी इनकी ही खोज थी |

२८. चूहे पर बैठकर भी मनुष्य सवारी कर सकता है ये भी इनकी ही खोज थी|

२९. वैज्ञानिक बेशक आज तक किसी मनुष्य का भविष्य बताने में सक्षम न हो लेकिन ये किसी का भी भूत,भविष्य और वर्तमान बताने में सक्षम है |

३०. पृथ्वी, सूर्य,चन्द्र, मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र, शनि,सोम जैसे गृह भी जीवित प्राणी ही नहीं देवता भी हैं जो किसी का शुभ और अशुभ कर सकते हैं | ये भी इन्ही की खोज थी |

कितनी महान खोजे है इनकी जिनसे विश्व में भारत का नाम रोशन हुआ है लेकिन आरक्षण वालों ने आकर इनकी योग्यता को रोक का रख दिया है| 
बेचारे अब ऐसे अविष्कार और खोजें नहीं कर सकते है |
....
जय भीम             जय भारत

समस्त एस०सी०/एस०टी० सांसद, 117वॉ संविधान संशोधन (प्रोन्नति में आरक्षण बिल) लोकसभा में पास कराओ या इस्तीफा दो

सेवा में
          सर्व श्री, 

समस्त एस०सी०/एस०टी० सांसद, भारत सरकार

विषय:-117वॉ संविधान संशोधन (प्रोन्नति में आरक्षण बिल) लोकसभा में पास कराओ या इस्तीफा दो

महोदय/महोदया
             आपको भली भांति अवगत है कि 117 वां संविधान संसोधन बिल राज्य सभा से पारित हो चुका है और लोक सभा में लम्बित है।जब कि यह बिल 1995 से लम्बित था आप जिस पार्टी से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उस सरकार ने अपनी दलितविरोधी मानसिकता का उदाहरण दे दिया है।
   आप यूपी से लोक सभा की उन सीटों से सांसद है जो भारत के संविधान में उल्लेखित प्रतिनिधत्व अधिकार पर संरक्षित है इसलिए आज आप सांसद है और संसद मे दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं किन्तु आप अपने दलित समाज के अधिकारो के लिए संसद मे आवाज क्यों नहीं उठाते हो।
         आप की सरकार पूर्ण बहुमत की सरकार है आप सभी दलित सांसद सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाते हो। ऐसी क्या मज़बूरी है की आप सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री को इस्तीफा क्यों नही सौंप देते है क्यों आप सक्रिय भूमिका नहीं अपनाते हो??
       आप भी बाबा साहेब को धोखा दे रहे हो। आप समाज के प्रति ज़िम्मेदार नहीं हो। आप ने आरक्षण के बल पर सांसदी तो ले ली लेकिन आप उन लाखों लोगों की ओर नहीं देख रहे हैं जो आप की निष्क्रियता के कारण तमाम कानूनी/ सरकारी बाध्यताओं को झेलने को मजबूर है कुछ तो शर्म करो।
       यदि आप सक्रिय भूमिका नहीं अदा कर सकते तो आप या तो बिल पास कराओ या समाज के लोगो के बीच मत जाओ। आप का समाज के लोग इस्तीफा मांग रहे हैं आप चुन सकते हैं 

सांसदी या समाज। 

वर्ना वो दिन दूर नही जब समाज के लोग बहिष्कार करंगे।
   अतः आप से आग्रह है कि 117वॉ संविधान संशोधन बिल पास कराओ या इस्तीफा दो। 


भवदीय
देवेन्द्र  कुमार
अध्यक्ष,एससी/एसटी एसोसिएशन  
एस.बी.आई.,पटना मंडल 

" इस मैसेज को इतना शेयर करें कि सभी दलित सांसदों तक पहुँच जाये।
 आपकी रगों में सच्चे दलित का खून है तो कम से कम 10 लोगों को शेयर करें ।"

मनुस्मुर्ति में क्या कहा है


जय भीम दोस्तों, आज"मनुस्मृति दहन दिवस" है।
आज ही के दिन
बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने 25
दिसम्बर 1927
को महाराष्ट्र के महाड में इस सबसे बर्बर और
कुख्यात ग्रन्थ
"मनुस्मृति" को जलाया था। जिसके के कारण
हम सदियों से
गुलामी और जिल्लत का जीवन जीने के लिए
विवश थे। आओ हम
भी मनुस्मृति जलायें और इस दिन
को "मानवाधिकार
मुक्ति दिवस" के रूप में मनायें।
जाने "मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं यह देखिये- १-
पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रु
द्धा किसी भी स्वरुप में
नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -
मनुस्मुर्तिःअध्याय-९
श्लोक-२ से ६ तक. २- पति पत्नी को छोड
सकता हैं, सुद
(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन
स्त्री को इस
प्रकार के अधिकार नही हैं.
किसी भी स्थिती में, विवाह के
बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. -
मनुस्मुर्तिःअध्याय-९
श्लोक-४५ ३- संपति और मिलकियत के
अधिकार और दावो के
लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं,
स्त्री को संपति रखने
का अधिकार नही हैं,
स्त्री की संपति का मलिक
उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्
याय-९
श्लोक-४१६. ४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये
सब ताडन के
अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह
मार सकते
हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने
को मिलता हैं, वह
लिखते हैं-"शुद्र, गमार, ढोल, पशु, नारी, सकल ताड़न के अधिकारी." -
मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९ ५- असत्य
जिस तरह अपवित्र
हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं,
यानी पढने का, पढाने
का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन
का स्त्रियो को अधिकार
नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और
अध्याय-९
श्लोक-१८. ६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के
कारण वह
यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर
सकती.(इसी लिए
कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") -
मनुस्मुर्तिःअध्याय-११
श्लोक-३६ और ३७ . ७- यग्यकार्य करने
वाली या वेद मंत्र बोलने
वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन
नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए
सभी यग्य कार्य अशुभ
होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. -
मनुस्मुर्तिःअध्याय-४
श्लोक-२०५ और २०६ . ८- - मनुस्मुर्ति के
मुताबिक तो ,
स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२
श्लोक-२१४ . ९ -
स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने
वाली हैं. अध्याय-२
श्लोक-२१४ १० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने
वाली.
अध्याय-२ श्लोक-२१५. ११. - स्त्री संभोग के
लिए उमर
या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९
श्लोक-११४. १२-
स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर
निष्ठारहित होती हैं.
अध्याय-२ श्लोक-११५. १३.- केवल शैया, आभुषण
और
वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त,
बेईमान,
इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७.
१४.- सुखी संसार
के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस
प्रश्न के उतर में मनु
कहते हैं- (१). स्त्रीओ को जीवन भर
पति की आग्या का पालन
करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५
श्लोक-११५. (२).
पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त
हो, दुर्गुणो से
भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर
भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह
पूजना चाहिए.-
मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४. जो इस
प्रकार के उपर के ये
प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के
विधान वाले पोस्टर
क्यो नही छपवाये? (१) वर्णानुसार करने के
कार्यः - -
महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए
ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-
भिन्न कर्म करने
को तै किया हैं - - पढ्ना,पढाना,यग्य करना-
कराना,दान
लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं.
अध्यायः१:श्लोक:८७ -
प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह
सब क्षत्रिय
को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९ -
पशु-पालन , दान
देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य
को करने
का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०. - द्वेष-
भावना रहित,
आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-
वर्गो की नि:स्वार्थ
सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. -
अध्यायः१:श्लोक:९१. (२)
प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:- -
ब्राह्मण का नाम
मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर - क्षत्रिय
का नाम शक्ति सूचक
- उदा. सिंह - वैश्य का नाम धनवाचक
पुष्टियुक्त - उदा. शाह -
शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा.
मणिदास,देवीदास - अध्यायः२:श्लोक:३१-३२.
(३) आचमन के
लिए लेनेवाला जल:- - ब्राह्मण को ह्रदय तक
पहुचे उतना. -
क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना. - वैश्य को मुहं
में फ़ैले उतना. -
शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन
लेना चाहिए. -
अध्यायः२:श्लोक:६२. (४) व्यक्ति सामने मिले
तो क्या पूछे?:- -
ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे. - क्षत्रिय
को स्वाश्थ्य विषयक
पूछे. - वैश्य को क्षेम विषयक पूछे. - शूद्र
को आरोग्य विषयक पूछे.
- अध्यायः२:श्लोक:१२७. (५) वर्ण
की श्रेष्ठा का अंकन :- -
ब्राह्मण को विद्या से. - क्षत्रिय को बल से. -
वैश्य को धन से. -
शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह
जन्म से ही शूद्र हैं)
- अध्यायः२:श्लोक:१५५. (६) विवाह के लिए
कन्या का चयन:- -
ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर
सकता हैं. -
क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर
सभी तीनो वर्ण
की कन्याये पंसद कर सकता हैं. - वैश्य - वैश्य
की और शूद्र की ऎसे
दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. - शूद्र
को शूद्र वर्ण
की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर
सकता हैं.-
(अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण
से बाहर अन्य
वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता. (७)
अतिथि विषयक:-
- ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण
ही अतिथि गीना जाता हैं,(और
वर्ण की व्यक्ति नही) - क्षत्रिय के घर ब्राह्मण
और क्षत्रिय
ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे. - वैश्य के
घर
ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज
अतिथि हो सकते हैं,
लेकिन ... - शूद्र के घर केवल शूद्र
ही अतिथि कहेलवाता हैं -
(अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ
नही सकता... (८)
पके हुए अन्न का स्वरुप:- - ब्राह्मण के घर
का अन्न अम्रुतमय. -
क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप. - वैश्य के
घर का अन्न जो है
यानी अन्नरुप में. - शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप
हैं यानी वह
खाने योग्य ही नही हैं. (अध्यायः४:श्लोक:१४)
(९) शब को कौन
से द्वार से ले जाए? :- - ब्राह्मण के शव को नगर
के पूर्व द्वार से ले
जाए. - क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से
ले जाए. - वैश्य के
शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए. - शूद्र के शव
को दक्षिण
द्वार से ले जाए. (अध्यायः५:श्लोक:९२) (१०)
किस के सौगंध लेने
चाहिए?:- - ब्राह्मण को सत्य के. - क्षत्रिय
वाहन के. - वैश्य
को गाय, व्यापार या सुवर्ण के. - शूद्र को अपने
पापो के
सोगन्ध दिलवाने चाहिए. (अध्यायः८:श्लोक
:११३) (११)
महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:- -
ब्राह्मण अगर
अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन
करे. - क्षत्रिय
अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १०००
भी दंड करे. - वैश्य
अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे
तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और
१ साल के लिए
कैद और बाद में देश निष्कासित. - शूद्र अगर
अवैधिक(गैरकानूनी)
संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन
ली जाये ,
उसका लिंग काट लिआ जाये. - शूद्र अगर
द्विज-जाती के साथ
अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक
अंग काटके
उसकी हत्या कर दे. (अध्यायः८:श्लोक
:३७४,३७५,३७९) (१२)
हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:-
- ब्राह्मण
की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्मह
त्या करने
वालो को उसके पाप से
कभी मुक्ति नही मिलती) - क्षत्रिय
की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से
का पाप लगता हैं.
- वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे
हिस्से का पाप
लगता हैं. - शूद्र की हत्या करने से
ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से
का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र
की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं) -
(अध्यायः११:श्लोक:१२६)

भारत में धर्म और विज्ञान का कभी टकराव नहीं हुआ

चर्च ने 1481 और 1808 के बीच लगभग 32,000 लोगों को जिंदा जला दिया. इनमें से ज्यादातर वे थे, जो चर्च के फैलाए अंधविश्वास के खिलाफ थे, विज्ञान की बात कर रहे थे, चर्च के दबदबे को विचार के स्तर पर चुनौती दे रहे थे. (प्रोफेसर जॉन विलियम ड्रेपर, हिस्ट्री ऑफ द कन्फ्लिक्ट बिटविन रिलीजन एंड साइंस, पेज नंबर- 278.) पश्चिम में विज्ञान, धर्म और आस्था से टकराकर और इसकी कीमत चुकाकर आगे बढ़ा.

चर्च ने आखिरकार अपनी हार मानी. जिस चौराहे पर ब्रूनो को चर्च ने जलाकर मार डाला था, वहीं चर्च की पहल पर आज ब्रूनो की मूर्ति लगी है.

भारत में ज्ञान और धर्म एक ही बिरादरी के कंट्रोल में रहा और तथाकथित वैज्ञानिकों ने माथे पर तिलक और सिर पर चुटिया धारण कर ली. जनेऊ तो उनके पास था ही. यहां सारा संचित ज्ञान इस काम में कुछ हो गया कि बहुसंख्य लोगों को कैसे कंट्रोल किया जाए.

भारत में धर्म और विज्ञान का कभी टकराव नहीं हुआ. इसलिए भारत में न तो औद्योगिक क्रांति मुमकिन थी और न ही वैज्ञानिक क्रांति या अनुसंधान. ये उपग्रह छोड़ने से पहले उसकी सफलता के लिए, तिरुपति में पूजा करने वाली जमात है.