Wednesday, January 27, 2016

भारतीय संविधान की जमकर धज्जियां उड़ाई गई

67 वें गणतंत्र दिवस पर राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा विधान सभा क्षेत्र की कांकड़ा ग्राम पंचायत में भारतीय संविधान की जमकर धज्जियां उड़ाई गई।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यक्रम में अनुसूचित जातियों के अलग टेन्ट लगाये गये एवं बात टेन्ट पर ही खत्म नहीं हुई बल्कि वहाँ भोजन करने के लिए उनको खाने के बर्तन भी नहीं दिए गए,  दलितों को अपने घरों से बर्तन लाने पर मजबूर किया गया।
भारत का संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है लेकिन मनुवादी सरकारों के सामने भारत का संविधान कोई मायने नहीं रखता है।
सरकारों द्वारा एक ओर तो गणतंत्र दिवस मनाने पर अरबों रूपये पानी की तरह बहाया जाता है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी खूला जातिवादी भेदभाव किया जाता है साथ ही मूल निवासी महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकने के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है, मोदी सरकार की यह कैसी दोगली नीति है।
बीकानेर जिले की नोखा विधानसभा क्षेत्र की कांकड़ा ग्राम पंचायत में दलितों का अपमान तो हुआ ही है लेकिन साथ में भारतीय संविधान  का भी मजाक उड़ाया गया है क्योंकि उनकी नजर  में यह एक दलित का लिखा हुआ संविधान है इसलिए उसका पालन कोई जरूरी नहीं है।
इस घटना से पूरे राजस्थान के दलितों में रोष व्याप्त है इसलिए राजस्थान सरकार के विरूद्द विरोध प्रदर्शन किए जाऐंगे।
रोहित वेमुला की मोत के विरोध मे पूरे देश के दलित लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं लेकिन मोदी सरकार के कानों की। जूं तक नहीं रेंगी है।
3 फरवरी को भारत की प्रथम अध्यापिका माता सावित्री बाई फुले के जन्म दिन के साथ ही पूरे देश में विरोध प्रदर्शन तेज किये जायेंगे और तब तक जारी रहेंगे जब तक रोहित वेमुला के मामले मे HRD मंत्री श्रीमति स्मृति ईरानी तथा नोखा के कांकोड़ा मामले में दोषियों को सजा नहीं मिल जाती है।
वसुंधरा सरकार होश में आओ
संविधान का मजाक मत उड़ाओ।

दलितों से जो भी छूआछूत करेगे
वो कुते की मोत मरेगा ।

जन जन की पूकार है
अपमानित होकर जीना धिक्कार है।

दलितों का अपमान और संविधान का मजाक, अब बिलकुल नहीं सहेंगे।

भारत में हमारी कोई नहीं सुन रहा है
अब संयुक्त राष्ट्र संघ में जाकर यह बात कहेंगे।

रोहित वेमुला के मामले में पूरे देश के दलितों ने अपनी पूरी ताकत झोंकदी

किसी के खिलाफ कुछ नहीं करूँगा, नरेन्द्र मोदी ने यह ताल ठोक दी।

बाबा साहेब अम्बेडकर का नाम तो वोट पाने के लिए लेते हैं

लेकिन उनके द्वारा लिखे हुए संविधान की तो खूले आम धज्जियां उड़ाते हैं।

यदि दलितों को जोश आ गया
तो समझो नरेन्द्र मोदी को होश आ गया।

यु एन ओ में जब दलितों की अर्जी लगेगी
तभी मोदी की हट धर्मिता छूटेगी।

दलितों ने अब सबको जान लिया
इस बार आरपार की लड़ाई लड़ेंगे ऐसा मन में ठान लिया।
🙏🙏🙏💪💪💪👏🏻👏🏻👏🏻

रोहित वेमुला मौत:परत दर परत पूरी कहानी

रोहित वेमुला मौत:परत दर परत पूरी कहानी, पूरा ऐंगल

Friday, January 22, 2016, 12:22BUREAUCRACY, CORPORATE, HEADLINE, OTHER'S VOICE2 comments

 वरिष्ठ पत्रकार निखिल आनंद दलित छात्र रोहित वेमुला से जुड़े विवाद, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी व बंडारु दत्तात्रय की भूमिका और  रोहित की मौत की परत-दर परत खोल रहे हैं.

रोहित चक्रवर्ती वेमुला उर्फ रोहित नाम का 26 साल का युवा फाँसी के फंदे पर झुलकर जान दे देता है। इस घटना के बाद दो धाराओं में बहस चल पड़ती है जो देश की सामाजिक पृष्ठभूमि को जानने- समझने के लिये काफी है। एक सवर्णवादी धारा रोहित को कायर, बुजदिल, अतिवादी, देशद्रोही और आरोपी करार दे रही है तो दूसरी बहुजनवादी धारा उसे क्रांतिकारी, दलित नायक, शहीद और सामाजिक न्याय का नायक और पीड़ित बता रहा है।

अगर रोहित जीवित होता तो 30 जनवरी, 2016 को जिन्दगी के 27 साल का जश्न मना रहा होता।

भारत सरकार के श्रममंत्री बंडारू दत्तात्रेय के लिखे पत्र और शिक्षामंत्री स्मृति इरानी के अग्रसारित पत्र के अनुसार रोहित एक अतिवादी, जातिवादी और राष्ट्रद्रोही मुहिम का हिस्सा था। लेकिन इन आरोपों का गंभीरता से विश्लेषण करें तो अतिवादी होना एक स्वभाव एवं विचारधारा से जुड़ी बात है वहीं जाति इस भारत भूमि पर पैदाइश से जुड़ी सामाजिक हकीकत।

कौन है जातिवादी

यूँ इस देश में कट्टर अतिवादी होने के नाम पर हिन्दू हो या मुसलमान किसी को भी अकारण ही बिना अपराध के सजा दिये जाने के कारण नहीं बनता हैं। पर जिस देश में समाज की मूल अवधारणा ही जाति पर बनी हो, किसी को जातिवादी करार देना कोई बड़ी बात नहीं है। रोहितअगर दलित या पिछड़ा होते हुये जातिवादी था तो उसके विरोध मेंखड़ी पूरी जमात कोई सामाजिक क्रांति के अग्रदूतों की नहीं बल्किस्वाभाविक तौर पर सवर्ण– मनुवादी– ब्राह्मणवादी औरजातिवादी ही दिखाई देती है।

याकूब मेमन को मिले फाँसी की सजा के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से पक्ष रखना अगर अपराध है तो देश में संविधान, कानून, पुलिस- प्रशासन भी है।  फिर याकूब मेमन या अफजल गुरू का जिसने मुकदमा लड़ा हो तो उन सबको क्यों न फाँसी पर लटका देना चाहिये।

दो मंत्रियों की भूमिका

रोहित पर लगे आरोप उसके विरोधियों के राजनीतिक बचाव के लिये मायने जरूर रखते होंगे लेकिन अब वो दुनिया में नहीं है तो उसके परिवार एवं समर्थकों के लिये जानना महत्वपूर्ण है कि उसकी मौत क्यों, कैसे, हुई। इसकी उच्चस्तरीय जाँच होनी चाहिये लेकिन निष्पक्ष जाँच कैसे संभव होगी यह भी सवाल है क्योंकि इसमें केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के दो मंत्री स्पष्ट तौर पर और तकनीकी रूप से शामिल है।

दत्तात्रय व ईरानी की चिट्ठी

इस घटना आलोक में बंडारू दत्तात्रेय को स्मृति इरानी को लिखे गये एक पत्र में विश्वविद्यालय को 'अतिवादी- जातिवादी- राष्ट्रद्रोही राजनीति का गढ़'  एवं कुलपति को मूकदर्शक घोषित करते हुये सख्त कार्रवाई करने को कहा था। फिर इसी को आधार बनाकर स्मृति इरानी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को -वीआईपी- नोटिंग कर 5 पत्र लिखे जो साबित करते हैं कि एक बड़े स्तर का राजनीतिक दबाव जो हस्तक्षेप ही नहीं बल्कि इस पूरे मामले को निर्देशित किया जा रहा था।

केन्द्रीय मंत्रियों बंडारू एवं स्मृति के बढ़ते दबाव ने नि:संदेह कुलपति को दलित छात्रों के खिलाफ कार्रवायी को बाध्य कर दिया। रोहित को भगोड़ा और कायर घोषित करने वाले लोगों के लिये यह जानना जरूरी है कि अपनी मौत के दो हफ्ते पूर्व से वह विश्वविद्यालय कैम्पस के बाहर टेन्ट में रहने को बाध्य था और उसका 25 हजार रूपये का पीएचडी रिसर्च फेलोशिप जुलाई, 2014 से नहीं दिया जा रहा था।

पत्र लिखा कर रोहित ने की थी जहर की मांग

अपनी मृत्यु के पूर्व रोहित ने एक पत्र छोड़ा था जिसकी चर्चा आम है लेकिन इसके एक महीने पूर्व दिसम्बर में उसने कुलपति को लिखे अपने पत्र में न्याय न दिये जाने की स्थिति में जहर या फाँसी का फंदा देने की अपील की थी। इस पत्र में उसने खुद को 'दलित आत्मसम्मान मुहिम' का सदस्य बताते हुये अपनी तरह के छात्र जो विश्वविद्यालय परिसर में लगतार चल रहे आम उत्पीड़न के माहौल से परेशान है मुक्ति की नींद सुला देने की गुजारिश की थी। इस पत्र की भाषा जाहिर करती है कि किसी जोश या होश खोकर लिखा गया नहीं है बल्कि बेहद संवेदनशील उदगार है जो विश्वविद्यालय परिसर के बहुजन विरोधी माहौल को उजागर करते हैं।

ये रही पहली जांच, ये रही दूसरी

रोहित अम्बेदकर स्टुडेन्ट एसोशियेशन नामक संगठन के उन पाँच छात्रों में शामिल था जिन्हें एबीवीपी कार्यकर्ता की पिटाई के मामले में विश्वविद्यालय से सस्पेंड किया गया था। इस संबंध में विश्वविद्यालय के द्वारा गठित विशेष जाँच समिति ने इन छात्रों को आरोप मुक्त कर दिया गया था। इसके बाद एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर बंडारू दत्तात्रेय को अपने पक्ष खड़ा किया। फिर बंडारू ने स्मृति और स्मृति के कुलपति को हड़काने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे चार महीने के उपरांत मामले में अपने ही फैसले पर पुनर्विचार किया और संबंधित दलित छात्रों को हॉस्टल, कैन्टीन, कैफेटेरिया सहित कैम्पस बहिष्कृत कर दिया।

जब ये छात्र बाहर निकाले जा रहे थे तो पूरा एबीवीपी संगठन अपनी जीत का जश्न मनाते हुये तालियाँ बजाकर उन्हें चिढ़ा रहा था। विश्वविद्यालय से इन छात्रों को सिर्फ निकाला नहीं गया था बल्कि जातिवादी मानसिकता के तहत सामाजिक तौर पर बहिष्कृत किया गया था। 21वींसदी सामाजिक बहिष्करण के सिद्धांत को समझना तो जरूर आसान है जब विश्वविद्यालयों में सोशल एक्सक्लूजन सेन्टर खोले जा रहे हैं। रोहित पर कार्रवाई में जिस एबीवीपी कार्यकर्ता संदीप को पीटने का आरोप था उसके बारे में यह बात साफ हो गई हैं कि घटना के दो दिनों के बाद उसके एपेन्डिक्स का ऑपरेशन हुआ जिसें यह रहस्य खुलने तक संगीन मामला बनाकर आरोपी छात्रों के खिलाफ पेश किया गया था।

 

असल लड़ाई को दलित बनाम पिछड़ा बनाने का खेल

यह भी खबर पेश की जा रही है कि रोहित दलित नहीं पिछड़ा है या फिर उसकी माँ पिछड़ी जाति से है और पिता दलित है। उसी तरह बंडारू दत्तात्रेय के कभी दलित या फिर पिछड़ा (यादव) होने को प्रचारित किया जा रहा है। जाहिर है दलित बनाम दलित, पिछड़ा बनाम पिछड़ा या दलित बनाम पिछड़ा की स्थिति पैदा कर रोहित की मौत से उभरे सवालों को संघ- बीजेपी दफन करने की जी-तोड़ कोशिश में लगी है।

फिलहाल माँ- बाप ने एक होनहार क्रांतिकारी मिजाज बेटा खोया और शोषित (दलित या पिछड़ा) समाज के अपना एक नेतृत्वकर्ता युवक खो दिया। जाहिर है कि देश ने कुछ भी नहीं खोया होगा क्योंकि देशभक्ति का प्रमाण-पत्र बाँटने की ठेकेदारी कर रही पार्टी के गुर्गों की परिभाषा के दायरे में रोहित देश विरोधी था जिसकी परिणति वे मौत मानते हैं।
जय भीम नमो बुद्धाय

रामायण पाठ होने चाहिए या संविधान पाठ ?

रामायण पाठ होने चाहिए या संविधान पाठ ❓❓


रामायण पाठ करने वाले लोग अपने देश का सविधान तक नहीं जानते 
ये कमी किस वजह से है इसमें कौन लोग दोसी है जिस देश में लोग रहते है उस देश का सविधान के बारे में ज्ञान न होना उसके बारे में जानकरी न होना ।

अब प्रशन उठता है की ऐसा क्यो

 जब काल्पनिक रामायण , गीता , का ज्ञान भारत के हर धर्म के छोटे छोटे बच्चों तक को रामायण के हर पात्र की जानकारी है ।

लेकिन हमारे भारत के सविधान की क्यो नहीं है इसमें कौन लोग दोसी है क्या इसमें हमारी भारत सरकार दोसी नहीं है ❓

आखिर रामायण पाट 10 दिन 8 दिन हर गांव शहर में कराये जाती है ।
जिससे मानव को फायदा नहीं होता ।
रामायण पाट से मनुवादियो को जरूर फायदा पहुंचता है उन्हें सत्ता तक बनाये रखने का आसान तरीका यही है आज भी गाँवो में कोई विकास मत कराओ  कोई कुछ भी   काम मत आओ पर आप भगवत गीता पाट कराओ , रामायण पाठ  कराओ ।

सब बिना बुलाये चले आएंगे यह है इस देश का दुर्भाग्य जिन्होंको यह भारतीय सविधान के प्रचार प्रसार करना चाहिए ।
वह रामायण , और भगवत गीता पाठ  करा रहे है ।

फिर कैसे उमीद कर सकते है की 99%  लोगों को सविधान के बारे में ज्ञान नहीं है ।।

ये तो बहुत सही रहा ये 1% लोगों

 की वजह से भारतीय सविधान चल भी रहा है ।

 वर्ना मन्वादि ब्राह्मण कब का मनुस्मर्ति भारत में कब की लागु कर देते ।

अत मेरी मूलनिवासी बहुजन समाज के बुद्धि जीवि साथियों से नम्र हाथ जोड़ कर प्रार्थना है की जो लोग गाँव में रहते है ।
वह लोग अपने अपने स्तर अम्बेडकर जी के बनाये सविधान का प्रचार अपने सुख सुविधा अनुसार निरन्तर करे ।
अगर सक्षम है तो उसे उसी तरह से पढ़े जेसे रामायण पाठ कराया जाता है ।
उसी तरह से माईक से पढ़े ताकि ज्यादा से जयदा भारत के नागरिक भारतीय सविधान में दिए गए कानूनों के बारे में जान सके  । 

सुभाष सागर
जय भीम नमो बुद्धस्स

भारतीय संविधान ज्ञान सभा 2016

प्रिय साथिओ
जय भीम
जय मूलनिवासी 
हर साल की तरह इस साल  भी लगातार भारतीय संविधान  ज्ञान सभा आयोजित  संविधानिक  अधिकार प्रशिक्षण शिबिर में  सभी  जाती के लोगो  के बीच धूमधाम से  नेशनल  बी आर अम्बेडकर अवार्ड विनर आयु.रतिभाई मकवाना साहब और  दलित  कर्मशील डॉ.नितिन गुर्जर  के  उद्घघाटन  सत्र से   त्रि  सरन -पंचशील एवं ध्वज वंदन के 
साथ पंचशील बौद्ध विहार हॉल,बापूनगर  
अहमदाबाद में दिनांक -26  जनवरी 2016 67 वे गणतंत्र के दिन हुआ,
जिसमे कार्यक्रम के 
मुख्य वक्ता 
डॉ.राजन प्रियदर्शी 
(पूर्व एड़ी.डी .जी.पी - आई.पी.एस) 
आयु.अनिल प्रथम
(आई.जी.पी, सी.आई.डी क्राइम-आई.पीएस)
डॉ.प्रोफ.बलदेव अगजा 
(हेड पोलिटिकल साइंस एस.पी.यूनिवर्सिटी )डॉ.दिनेश परमार 
(पूर्व मिनिस्टर) 
आयु.भरत राठोड
(डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस-जी.पी.ऐस )
एस.एम.परमार 
(सुप्री.क्स्टम )
मुकेश मकवाना
( डिक्की -गुजरात) 
डॉ.जे.डी चंद्रपाल (वीडियो)
(स्कॉलर) 
हर्षद सोलंकी -आमंत्रित (GSRTC) जैसे  मार्गदर्शक  महानुभावो 
की  उपस्थिति में सम्पन हुआ ,शिबिर में पधारे सभी छात्रों-महिला- पुरुष शिबिरार्थी  को संविधान का मार्गदर्शन दिया गया,और साथ ही  भारत  सरकार -प्राइम मिनिस्टर द्वारा डॉ.बी.आर.अम्बेडकर नेशनल अवार्ड विजेता  आयु.रतिभाई मक वाना जी को समिति के कन्वीनर अशोक सम्राट द्वारा शॉल और  भारत  का संविधान देकर सन्मानित किया गया

शिबिर में 125 ज्यादा शिबिरार्थी ने भगलिया

 कार्यक्रम में उपस्थित पंचशील बौद्धविहार के ट्रस्टी पुष्पाजी पाटिल - यंग बुद्धिस्ट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया अरुणजी ,दिनेशजी - लुम्बिनी बौद्धविहार के  लंकेशजी-विजयजी, 
पंजीयन-हसमुखजी (IDBI)  
मिलाप (SBI)
साऊँड़ अक्षय -नरेंद्र
डेकोरेशन-गणेशजी
रसोई-रमेशभाई -मंदाबेन 
प्रोजेक्टर-बंटी 
मार्गदर्शक -वेर शी गढ़वी 
बेनर - ग्राफ़िक्स सुनील 
सभी नामी -अनामी ,जाने पहचाने अनगिनत ,प्रत्यक्ष या परोक्ष,तन -मन-धन,से सपोर्ट करने वाले  शिबिर  में पधारे -दूर से पधारे सभी शिबिरार्थी ,संगठन,व्यक्ति आदि सभी साथिओ को 
सत सत नमन ,वंदन,और बहुत बहुत साधुवाद,
नही उपस्थित  रेहने वाले सभी साथिओ को 
भी साधुवाद
सब का मंगल हो

अशोक सम्राट
कन्वीनर  
09924472489
भारतीय संविधान  ज्ञान सभा 
samratashok101 @gmail.com

याकुब मेमन की फाँसी रुकवाने के लिए जिन चालीस लोगो ने राष्ट्रपति को चिठ्ठी लिखी है..उनके नाम..!!

~क्या??? बाबा साहेब को पढ़ना अब राष्ट्रविरोधी गतिविधी हो गया है~
याकुब मेमन की फाँसी रुकवाने के लिए जिन
चालीस लोगो ने राष्ट्रपति को चिठ्ठी लिखी है..उनके नाम..!!
01- वृंदा_करात
02- प्रकाश_करात
03- शत्रुघ्न_सिन्हा
04- राम_जेठमलानी
05- महेश_भट्ट
06- शाहरुख_खान
07- अमिर_खान
08- सैफ_खान
09- नसीरुद्दीन_शाह
10- सलमान_खान
11- अरविंद_केजरीवाल
12- तिस्ता_सितलवाड
13- दिग्विजय_सिंह
14- लालू_यादव
15- नितीश_कुमार
16- अबु_आजमी
17- प्रशांत_भुषण
18- अससुद्दीन_ओवैसी
19- अखिलेश_यादव
20- आजम_खान
21- सचीन_पायलट
22- राहुल_राय
23- जनरैल_सिंहद
24- अलका_लांबा
25- आशुतोष
26- सागरिका_घोष
27- करिना_खान
28- सानिया_मिर्जा
29- अकबरूद्दिन_ओवैसी
30- शाजीया_इल्मी
31- अहमद_बुखारी
32- अभय_दुबे
33- रविश_कुमार
34- पुण्य_प्रसुन_बाजपेयी
35- ममता_बॅनर्जी
36- सिद्धारमैया
37-आशीष_खेतान
38- अग्निवेश
39- संजय सिंह
40- शकील_अहमद
सिर्फ फांसी का विरोध जताया- रोहित वेमुला और सभी अम्बेडकरवादी साथी
ताज्जुब है कि दत्तात्रेय बंडारू, स्मृति ईरानी और बाकी संघीयों को सिर्फ रोहित वेमुला और साथ में निष्काषित किये गए चार लोग ही राष्ट्र विरोधी लगे।
असल कारण ये है इन 40 लोगो में से कोई भी बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की विचारधारा पर चलने वाले और लोगो को बाबा साहेब के विचारो के प्रति जागरूक करने वाले नहीं रहे है।
बाबा साहेब को पढ़ना और उनके विचारो को लोगो तक पहुँचाना अब राष्ट्रद्रोह है? क्योंकि RSS की विचारधारा का सच मनुस्मृति और ब्राह्मणवाद पर आधारित हिन्दुवाद है। बाबा साहेब ने इसी ब्राह्मणवादी हिन्दुवाद से सावधान होने को कहा था।
अभी तक जिन्होंने बाबा साहेब को नहीं पढ़ा है, वो बाबा साहेब की किताबो और भाषणों को अवश्य पढ़े और अपने लोगो को पढ़ायें। जो अशिक्षित है, उन्हें बाबा साहेब की किताबो को पढ़ कर सुनाये।
लोगो को जागरूक करने के लिए इतना काफी है। बाबा साहेब की इन किताबो में वो शक्ति है, जिसकी वजह से महाराष्ट्र सरकार और बीजेपी RSS इतनी डर गई है कि इन संघीयों ने इन किताबो के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। (क्योंकि इन किताबो के कॉपी राइट्स सरकार के पास ही है)
आप समझ सकते है ऐसा क्या है इन पुस्तको में कि ब्राह्मणवाद की जड़े हिल गई है।

केंद्र सरकार ने रिसर्च स्लकॉरों की महज 8000 के आसपास की फेलोशिप को खत्म कर दिया है

चार खबरों को एक-दूसरे से जोड़ कर देखिए और भविष्य की भयावह तस्वीर का अंदाजा लगाइए- 
1- केंद्र सरकार ने रिसर्च स्लकॉरों की महज 8000 के आसपास की फेलोशिप को खत्म कर दिया है..! सैकड़ों स्टूडेंट्स लंबे समय से मौसम और प्रशासन की लाठी की मार सहते हुए यूजीसी के सामने इस फेलोशिप को बहाल करने की मांग के साथ धरने पर बैठे हैं, सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है..!
2- हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्टूडेंट रोहित ने 'आत्महत्या' कर ली, उसमें एक पहलू यह भी है कि उनका स्कॉलरशिप पिछले पांच महीने से रोक दिया गया था।
3- तमिलनाडु में एक प्राइवेट संस्थान में फीस नहीं चुका सकने की वजह से तीन लड़कियों ने खुदकुशी कर ली!
4- मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार नब्बे प्रतिशत (लगभग एक लाख आठ हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने जा रही है, राजस्थान के भाजपा राज में करीब 18000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद किया जा चुका है, कुछ दूसरे राज्यों में भी यह अभियान तेजी से चल रहा है..!
इसकी चपेट में तो सभी तबकों के कमजोर स्टूडेंट्स और समाज आएंगे, लेकिन असली संदेश यह है जो मनु-स्मृति और आरएसएस का मुखिया भागवत भी स्त्री के लिए कहता है कि लड़कियों, पढ़ना-लिखना बंद करो, रसोईघर संभालो..! दलित-वंचित जातियों के बच्चों, पढ़-लिख लोगे तो इस पंडावाद की गुलामी कौन करेगा..! 
दुनिया भर में सबसे निकृष्ट, बर्बर और असभ्य मनु-स्मृतीय समाज बनाने और शासन-व्यवस्था लागू करने के लिए मनु-स्मृति सामने होना नहीं, सत्ता और तंत्र पर पंडावाद का कब्जा होना जरूरी है..! इस मनु-स्मृतीय राज-समाज के भयावह नतीजों और छवियों का इंतजार कीजिए..

Tuesday, January 26, 2016

दलित सरपंच को धमकी, तिरंगा फहराया तो जान से मार देंगे

दलित सरपंच को धमकी, तिरंगा फहराया तो जान से मार देंगे
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Jan 26, 2016, 08.06AM IST
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आशीष चौहान, अहमदाबाद

मेहसाणा के नोरतल गांव के दलित सरपंच चंदू मकवाना को तिरंगा फहराने से रोकने के लिए धमकी दी गई है। गांव के ठाकुरों ने धमकी दी है कि अगर चंदू ने तिरंगा फहराया तो उसे जान से मार देंगे। ऐसा पहली बार नहीं है कि दलित सरपंच को धमकी मिली है। 

कुछ दिनों पहले पतंग उड़ाने के विवाद को लेकर चंदू मकवाना और उसके परिवार पर ठाकुर समुदाय के लोगों ने हमला बोल दिया था। इसके बाद मकवाना को पुलिस की सुरक्षा दी गई थी। अब सरपंच ने मांग की है कि गणतंत्र दिवस को मिली धमकी को देखते हुए उसकी पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी जाए। 

चंदू मकवाना ने कहा, 'मुझे बुरा परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है। ठाकुरों ने मुझे चेताया है कि दलित होने के नाते मैं तिरंगा नहीं फहरा सकता।' मकवाना को 15 जनवरी को हुए विवाद के बाद 9 पुलिसवालों की सुरक्षा दी गई थी। 

बाद में इसे घटाकर 4 कर दिया गया। पहले सशस्त्र जवान सुरक्षा में थे। बाद में केवल 4 ऐसे जवान सुरक्षा में लगाए गए जिनके पास लाठी है। खेरालू के डेप्युटी एसपी रठवा ने बताया कि 'चंदू ने गणतंत्र दिवस पर ज्यादा सुरक्षा की मांग की है। मैंने सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दे दिया है।'