Monday, October 17, 2016

संविधान दिवस चिरायु हो

संविधान दिवस चिरायु हो
🗣🗣चिरायु हो   🗣🗣 चिरायु हो

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🇮🇳 भारतीय संविधान📓 के निर्माण 📝के 6⃣7⃣वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में  सीतापुर में  संविधान दिवस का आयोजन होने जा रहा है |

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🎯🎯 संविधान दिवस समारोह🎯🎯



🔷जिसमें अनेक विद्वान वक्ताओं द्वारा संविधान पर विशेष वक्तव्य दिये जायेंगें |
जिसमें संविधान के अनेकों भागों के विषय में व्याख्यान व भागों का वर्णन किया जायेगा |🔷

🔵 अलग -अलग वक्ताओं द्वारा संविधान के अलग -विषयों पर वक्तव्य दिये जायेंगें |🔵
           🏠🏠 स्थान 🏠🏠
 
   ⛲     डॉ० अम्बेडकर पार्क⛲
 🚦🚦 नियर लाल बाग चौराहा🚦🚦
        कचहरी के सामने
             सीतापुर
          (  उ०प्र०  )
     
🗓🗓 दिनाँक 🗓🗓
2⃣7⃣ नवम्बर  2⃣0⃣1⃣6⃣

🗓🗓 दिन  🗓🗓
          रविवार

🕙🕙 समय🕙🕙
प्रात:-1⃣0⃣:0⃣0⃣बजे


   🎙🎙 वक्तागण 🎙🎙
🔹श्रद्धेय डॉ०अवधेश कुमार सिंह
🔹 श्रद्धेय राजेश कुमार अहिरवार
🔹 श्रद्धेय धर्मेन्द्र सिंह राना
🔹 श्रद्धेया मुन्नी बौद्ध
🔹 श्रद्धेया त्रिरत्न शीला
एवं अन्य वक़्तागण

🎤🎤  मंचसंचालक🎤🎤

      🔵 संघप्रिय गौतम🔵


🙏🏻🙏🏻🙏🏻 निवेदक 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

🔵संघप्रिय गौतम
📞8090468577 ,9455752577

🔵बी०आर० कुरील
📞9455112379

🔵यू० के० बौद्ध
📞9838680791

🔵धर्मेन्द्र सिंह राना
📞9258414243

एवं सीतापुर के अन्य साथी|

कृपया अधिकाधिक  संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम की शोभा  बढायें 

एक किसान की मन की बात

एक किसान की मन की बात:-
😞😞😞😞😞😞😞😞😞
कहते हैं..

इन्सान सपना देखता है
तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
किसान के सपने
कभी पूरे नहीं होते
बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है.

बड़ा खुश होते हुए जाता है.

बच्चों से कहता है
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा,

पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा.
😞😞😞😞😞
पत्नी:–”अरे नही जी..!”
“ये तो अभी ठीक है..!”
“आप तो अपने लिये
जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!”

जब
किसान मंडी पहुँचता है .

ये उसकी मजबूरी है
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता.

व्यापारी
उसके माल की कीमत
अपने हिसाब से तय करते हैं.

एक
साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.

एक
माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.

लेकिन किसान
अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .

खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.

माल तौलाई के बाद
जब पेमेन्ट मिलता है.
…
वो सोचता है
इसमें से दवाई वाले को देना है, खाद वाले को देना है, मज़दूर को देना है ,

अरे हाँ,
बिजली का बिल
भी तो जमा करना है.
…
सारा हिसाब
लगाने के बाद कुछ बचता ही नहीं.

वो मायूस हो
घर लौट आता है
बच्चे उसे बाहर ही इन्तज़ार करते हुए मिल जाते हैं.

“पिताजी..! पिताजी..!” कहते हुये उससे लिपट जाते हैं और पूछते हैं:-
“हमारे नये कपडे़ नहीं ला़ये..?”

पिता:–”वो क्या है बेटा..,
कि बाजार में अच्छे कपडे़ मिले ही नहीं,
दुकानदार कह रहा था
इस बार दिवाली पर अच्छे कपडे़ आयेंगे तब ले लेंगे..!”

पत्नी समझ जाती है, फसल
कम भाव में बिकी है,
वो बच्चों को समझा कर बाहर भेज देती है.

पति:–”अरे हाँ..!”
“तुम्हारी साड़ी भी नहीं ला पाया..!”

पत्नी:–”कोई बात नहीं जी, हम बाद में ले लेंगे लेकिन आप अपने जूते तो ले आते..!”

पति:– “अरे वो तो मैं भूल ही गया..!”

पत्नी भी पति के साथ सालों से है पति का मायूस चेहरा और बात करने के तरीके से ही उसकी परेशानी समझ जाती है
लेकिन फिर भी पति को दिलासा देती है .

और अपनी नम आँखों को साड़ी के पल्लू से छिपाती रसोई की ओर चली जाती है.

फिर अगले दिन
सुबह पूरा परिवार एक नयी उम्मीद ,
एक नई आशा एक नये सपने के साथ नई फसल की तैयारी के लिये जुट जाता है.
….

ये कहानी
हर छोटे और मध्यम किसान की ज़िन्दगी में हर साल दोहराई जाती है
…..

हम ये नहीं कहते
कि हर बार फसल के
सही दाम नहीं मिलते,

लेकिन
जब भी कभी दाम बढ़ें, मीडिया वाले कैमरा ले के मंडी पहुच जाते हैं और खबर को दिन में दस दस बार दिखाते हैं.

कैमरे के सामने शहरी महिलायें हाथ में बास्केट ले कर अपना मेकअप ठीक करती मुस्कराती हुई कहती हैं..
सब्जी के दाम बहुत बढ़ गये हैं हमारी रसोई का बजट ही बिगड़ गया.
………

कभी अपने बास्केट को कोने में रख कर किसी खेत में जा कर किसान की हालत तो देखिये.

वो किस तरह
फसल को पानी देता है.

१५ लीटर दवाई से भरी हुई टंकी पीठ पर लाद कर छिङ़काव करता है,

२० किलो खाद की
तगाड़ी उठा कर खेतों में घूम-घूम कर फसल को खाद देता है.

अघोषित बिजली कटौती के चलते रात-रात भर बिजली चालू होने के इन्तज़ार में जागता है.

चिलचिलाती धूप में
सिर का पसीना पैर तक बहाता है.

ज़हरीले जन्तुओं
का डर होते भी
खेतों में नंगे पैर घूमता है.
……

जिस दिन
ये वास्तविकता
आप अपनी आँखों से
देख लेंगे, उस दिन आपके
किचन में रखी हुई सब्ज़ी, प्याज़, गेहूँ, चावल, दाल, फल, मसाले, दूध
सब सस्ते लगने लगेंगे.
Please Send to your all groups
तभी तो आप भी एक मज़दूर और किसान का दर्द समझ सकेंगे।

आगे सैंड ज़रूर करो
आपसे अनुरोध है
"जय जवान जय किसान"

करवाचौथ: एक अन्धविश्वास

करवाचौथ व्रत या पत्नी को गुलामी का अहसास दिलाने का एक और दिन?
'श्रद्धा या अंधविश्वास'
दोस्तों क्या महिला के उपवास रखने से पुरुष की उम्र बढ़ सकती है?
क्या धर्म का कोई ठेकेदार इस बात की गारंटी लेने को तैयार होगा कि करवाचौथ जैसा व्रत करके पति की लंबी उम्र हो जाएगी? मुस्लिम नहीं मनाते, ईसाई नहीं मनाते, दूसरे देश नहीं मनाते और तो और भारत में ही दक्षिण, या पूर्व में नहीं मनाते लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इन तमाम जगहों पर पति की उम्र कम होती हो और मनाने वालों के पति की ज्यादा,
क्यों इसका किसी के पास जवाब नही है?
यह व्रत ज्यादातर उत्तर भारत में प्रचलित हैं, दक्षिण भारत में इसका महत्व ना के बराबर हैं, क्या उत्तर भारत के महिलाओं के पति की उम्र दक्षिण भारत के महिलाओं के पति से कम हैं ?
क्या इस व्रत को रखने से उनके पतियों की उम्र अधिक हो जाएगी?
क्या यह व्रत उनकी परपरागत मजबूरी हैं या यह एक दिन का दिखावा हैं?
दोस्तों इसे अंधविश्वास कहें या आस्था की पराकाष्ठा?
पर सच यह हैं करवाचौथ जैसा व्रत महिलाओं की एक मजबूरी के साथ उनको अंधविश्वास के घेरे में रखे हुए हैं।
कुछ महिलाएँ इसे आपसी प्यार का ठप्पा भी कहेँगी और साथ में यह भी बोलेंगी कि हमारे साथ पति भी यह व्रत रखते हैं। परन्तु अधिकतर महिलाओं ने इस व्रत को मजबूरी बताया हैं।
एक आम वार्तालाप में मैंने खुद कुछ महिलाओं से इस व्रत के बारे में पूछा उनका मानना हैं कि यह पारंपरिक और रूढ़िवादी व्रत है जिसे घर के बड़ो के कहने पर रखना पड़ता हैं क्योंकि कल को यदि उनके पति के साथ संयोग से कुछ हो गया तो उसे हर बात का शिकार बनाया जायेगा,
इसी डर से वह इस व्रत को रखती हैं।
क्या पत्नी के भूखे-प्यासे रहने से पति दीर्घायु स्वस्थ हो सकता है?
इस व्रत की कहानी अंधविश्वासपूर्ण भय उत्पन्न करती है कि करवाचौथ का व्रत न रखने अथवा अज्ञानवश व्रत के खंडित होने से पति के प्राण खतरे में पड़ सकते हैं, यह महिलाओं को अंधविश्वास और आत्मपीड़न की बेड़ियों में जकड़ने को प्रेरित करता है।
कुछ लोग मेरे इस स्टेटस पर इतनी लंबी-चौड़ी बहस करेगे लेकिन एक बार भी नहीं बतायेगे कि, ऐसा क्यों है कि, सारे व्रत-उपवास पत्नी, बहन और माँ के लिए ही क्यों हैं? पति, भाई और पिता के लिए क्यों नहीं.?
क्योंकि धर्म की नज़र मे महिलाओं की जिंदगी की कोई कीमत तो है पत्नी मर जाए तो पुरुष दूसरी शादी कर लेगा, क्योंकि सारी संपत्ति पर तो व्यावहारिक अधिकार उसी को प्राप्त है। बहन, बेटी मर गयी तो दहेज बच जाएगा। बेटी को तो कुल को तारना नहीं है, फिर उसकी चिंता कौन करे?
अगर महिलाओं को आपने सदियों से घरों में क़ैद करके रख के आपने उनकी चिंतन शक्ति को कुंद कर दिया हैं तो क्या अब आपका यह दायित्व नहीं बनता कि, आप पहल करके उन्हें इस मानसिक कुन्दता से आज़ाद करायें?
मैंने कुछ शादीशुदा लोगों से पूछना चाहता हूँ की क्या आज के युग में सब पति पत्निव्रता हैं?
आज की अधिकतर महिलाओं की जिन्दगी घरेलू हिंसा के साथ चल रही हैं जिसमें उनके पतियों का हाथ है।
ऐसी महिलाओं को करवाचौथ का व्रत रखना कैसा रहेगा?
भारत का पुरुष प्रधान समाज केवल नारी से ही सब कुछ उम्मीद करता हैं परन्तु नारी का सम्मान करना कब सोचेगा?
इस व्रत की शैली को बदलना चाहिए जिससे महिलाएँ दिन भर भूखी-प्यासी ना रहे,
एक बात और
मैंने अपनी आँखो से अनेक महिलाओ को करवा चौथ के दिन भी विधवा होते देखा है जबकि वह दिन भर करवा चौथ का उपवास भी किये थी,
दो वर्ष पहले मेरा मित्र जिसकी नई शादी हुई और पहली करवाचौथ के दिन ही घर जाने की जल्दी मे एक सड़क हादसे में उसकी मृत्यु हो गई, उसकी पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिए करवाचौथ का व्रत किए हुए थी, तो क्यों ऐसा हुआ?
करवा चौथ के आधार पर जो समाज मे अंध विश्वास, कुरीति, पाखंड फैला हुआ है, उसको दूर करने के लिए पुरुषों के साथ खासतौर से महिलाए अपनी उर्जा लगाये तो वह ज्यादा बेहतर रहेगा।
मुझे पता है मेरे इस लेख पर कुछ लोग मुझपर ही उँगली उठाएंगे, धर्म विरोधी भी कहेंगे लेकिन मुझे कोई फर्क नही पड़ता,
क्योंकि मैंने सच लिखने की कोशिश की है, मैं हमेशा पाखंड पर चोट करता रहा हूँ और कारता रहूँगा ।
मैं वही लिखता हूँ जो मैं महसूस करता हूँ।
इस सम्बन्ध मे आपसे अनुरोध है की इस पाखंड को खत्म करने मे पुरजोर समर्थन दे।

एक अम्बेडकरवादी व्यपारी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा.. "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो जबकि तुम तन्दुरुस्त हो...??"

जरूर पढ़े..........

एक अम्बेडकरवादी व्यपारी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा.. "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो जबकि तुम तन्दुरुस्त  हो...??"

भिखारी ने जवाब दिया... "मेरे पास महीनों से कोई काम नहीं है...
अगर आप मुझे कोई नौकरी दें तो मैं अभी  से भीख मांगना छोड़ दूँ"

अम्बेडकर वादी  मुस्कुराया और कहा.. "मैं तुम्हें कोई नौकरी तो नहीं दे सकता ..
लेकिन मेरे पास इससे भी अच्छा कुछ है...
क्यूँ नहीं तुम मेरे बिज़नस पार्टनर बन जाओ..."

भिखारी को उसके  कहे पर यकीन नहीं हुआ...
"ये आप क्या कह रहे हैं क्या ऐसा मुमकिन है...?"

"हाँ मेरे पास एक पानी का प्लांट है.. तुम पानी बाज़ार में सप्लाई करो और जो भी मुनाफ़ा होगा उसे हम महीने के अंत में आपस में बाँट लेंगे.."

भिखारी के आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े...
" आप मेरे लिए जन्नत के फ़रिश्ते बन कर आये हैं मैं किस कदर आपका शुक्रिया अदा करूँ.."

फिर अचानक वो चुप हुआ और कहा.. "हम मुनाफे को कैसे बांटेंगे..?
क्या मैं 20% और आप 80% लेंगे ..या मैं 10% और आप 90% लेंगे..
जो भी हो ...मैं तैयार हूँ और बहुत खुश हूँ..."

अम्बेडकर वादी ने बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ रखा ..
"मुझे मुनाफे का केवल 10% चाहिए बाकी 90% तुम्हारा ..ताकि तुम तरक्की कर सको.."

भिखारी अपने घुटने के बल  गिर पड़ा.. और रोते हुए बोला...
"आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा... मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूँ ...।

और अगले दिन से भिखारी ने काम शुरू कर दिया ..और
बाज़ार से सस्ते... और दिन रात की मेहनत से..बहुत जल्द ही उसकी बिक्री
काफी बढ़ गई... रोज ब रोज तरक्की होने लगी....

और फिर वो दिन भी आया जब मुनाफा बांटना था.

और वो 10% भी अब उसे बहुत ज्यादा लग रहा  था... उतना उस भिखारी ने कभी सोचा भी नहीं था... अचानक मनुवादी शैतानी ख्याल उसके दिमाग में आया...

"दिन रात मेहनत मैंने की है...और उस अम्बेडकर वादी ने कोई भी काम नहीं किया.. सिवाय मुझे अवसर देने की..मैं उसे ये 10% क्यूँ दूँ ...वो इसका
हकदार बिलकुल भी नहीं है..।

और फिर वो अम्बेडकर वादी इंसान अपने नियत समय पर मुनाफे में अपना हिस्सा 10% वसूलने आया और भिखारी ने जवाब दिया
" अभी कुछ हिसाब बाक़ी है, मुझे यहाँ नुकसान हुआ है, लोगों से कर्ज की अदायगी बाक़ी है, ऐसे शक्लें बनाकर उस अम्बेडकर वादी आदमी को हिस्सा देने को टालने लगा."

अम्बेडकर वादी आदमी ने कहा कि मुझे पता है तुम्हे कितना मुनाफा हुआ है फिर कयुं तुम मेरा हिस्सा देने से टाल रहे हो ?"

उस भिखारी ने तुरंत जवाब दिया "तुम इस मुनाफे के हकदार नहीं हो ..क्योंकि सारी मेहनत मैंने की है..."
*~~
????
#$#%*!

अब सोचिये...
अगर वो अम्बेडकर वादी हम होते और भिखारी से ऐसा जवाब सुनते ..
तो ...हम क्या करते ?


ठीक इसी तरह.........
बाबा साहब डॉ अम्बेडकर जी  ने भी हमें एक एज्यूकेटिड जिंदगी दी...  अधिकार दिए ....लड़ने की लिए कानून दिया...बोलने को जुबान दी.. मान, सम्मान, स्वाभिमान दिया..."

हमें याद रखना चाहिए कि दिन के 24 घंटों में  कम से कम 10% अम्बेडकर मिशन  के कामो में लगाना चाहिए ....

हमारी जिन्दगी भी कभी उस भिखारी की ही तरह थी लेकिन बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर जी ने हमको वो मान,सम्मान,शौहरत और रूतबा दिया है जिसके बारे मे शायद हमने सपने मे भी नहीं सोचा था।

इसलिए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं हम भी उस भिखारी की तरह एहसान फरामोश,लालची और नाशुक्रगुजार ना बन जाएं और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर जी के एहसानों को ना भूल जाएँ।

हमें बाबा साहब डॉ अम्बेडकर जी का शुक्रिया अदा करना चाहिए और बाबा साहब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा सहयोग करना चाहिए

जय  भीम  जय भारत
सबका मंगल हो..!

हरियाणा में जातिवाद के खिलाफ महाक्रांति की आवाज़ हुई मुखर

⁠⁠⁠⁠YESTERDAY⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠⁠⁠+91 99111 89986Nawab Satpal Tanwar⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠[23:10, 10/17/2016] +91 99111 89986: ⁠⁠⁠मनुवाद को अम्बेडकरवाद पर हावी होने से बचाओ। इस रविवार को भाई सतपाल तँवर के गांव खांड़सा में चले आओ। 🏃🏃🏃🏃🏃🚶🚶🚶🚶🚶 चलो खांड़सा चलो गुड़गांव चलो हरियाणा (THIS FIGHT FOR ALL BAHUJANS OF ALL INDIA AGAINST SC-ST ATROCITIES, CASTE ABUSE WORDS, AGAINST CASTEISM, BHIM BAHUJAN MAHAKRANTI, BHIM BAHUJAN MAHA AANDOLAN. मान और सम्मान की लड़ाई में हरियाणा की 360 गांवों की अनुसूचित जाति महापंचायत ने बहुजन समाज के बेटे नवाब सतपाल तँवर को अपना समर्थन दे दिया है। हरियाणा के 360 गांवों की अनुसूचित जाति महापंचायत इस रविवार को गांव खांड़सा में जमा होगी। हरियाणा सहित देश के कोने-कोने से भीम सैनिक क्रांति की हुंकार भरेंगे। मिशनरी गायकों का रैला गुडगाँव के खांड़सा में पहुंचेगा। दिनांक 4 सितंबर 2016, रविवार के ही दिन बहुजन समाज ने गुड़गांव के अम्बेडकर भवन से जिस महाआंदोलन की शुरुआत की थी वह महाआंदोलन अब समाज के बुजुर्ग पंचों के आशीर्वाद से जवां हो चला है। भारत में और हरियाणा में बहुजन समाज पर सदियों से हो रहे अत्याचारों की अब अति हो चुकी है। जातिसूचक शब्दों से समाज को अपमानित करने और मनुवादी लोगों के कानून के फंदे में फंसने के बाद समझौते करने के दवाब डालने का मनुवादियों का ढर्रा अब सहा नहीं जा सकता। जान से मारने की धमकियाँ और हमला करके जान लेने की कोशिशें अब समाज सहन नहीं करेगा। गिरफ्तार होने से बचने के लिए वीर बहादुर बहुजन समाज को बदनाम करके माननीय अदालत में झूठे कागजात पेश करके फायदा उठाना अब बर्दाश्त नहीं होगा। बहुत हुआ अत्याचार, बहुजन समाज के बेटों को जिन्दा जलाना अब महंगा पड़ेगा। बारात चढ़ने से रोकना और घोड़ी पर ना चढ़ने देना पुराना हो चुका मनुवादी लोगों का ढर्रा। युवा क्रांतिकारी भीम सैनिक अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। हरियाणा में बहुजन महाक्रांति की आग 4 सितंबर को लग चुकी थी। अब आने वाले रविवार की 23 अक्तूबर को इस आजादी की आग में भीम शक्ति का पैट्रोल डालना बाकी है। साथियों आपको आना है। बाबा साहब के कारवां को मंजिल तक ले जाना है। 🏃🏃🏃🏃🏃🚶🚶🚶🚶🚶 दिनांक 23 अक्तूबर 2016, रविवार, प्रात: 9 बजे। स्थान: जनता माडल स्कूल, बालाजी मन्दिर के सामने वाली गली, गांव खांड़सा, गुडगाँव (हरियाणा) फोन: 9310003886, 9911189986 👊शेयर👊 👍फारवार्ड👍 *👊शेयर👊*PLEASE JOIN FROM ALL STATES.
⁠⁠⁠⁠23:10⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠⁠⁠+30 694 766 9903Ranjit virdi⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠[01:13, 10/18/2016] +30 694 766 9903: ⁠⁠⁠https://youtu.be/d6gcesgf8vM
⁠⁠⁠⁠01:13⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠⁠⁠+44 7961 432771GS👑⁠⁠⁠⁠⁠



6:44
⁠⁠⁠⁠01:13⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠⁠⁠+91 99111 89986Nawab Satpal Tanwar⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠[01:34, 10/18/2016] +91 99111 89986: ⁠⁠⁠हरियाणा में जातिवाद के खिलाफ महाक्रांति की आवाज़ हुई मुखर। 4 सितंबर को शुरू हुए महाआंदोलन को मिला 360 महापंचायत का समर्थन। रविवार को गुड़गांव के गाँव खांडसा में बहुजन महासम्मेलन में जातिवाद के खिलाफ देश के कोने-कोने से शिरकत कर हज़ारों भीम सैनिक और बुजुर्ग भरेंगे भीम क्रांति की हुंकार। गुड़गांव से बड़ी खबर। ENN MEDIA हरियाणा में पिछले महीने जातिवाद के खिलाफ शुरू किये गए महाआंदोलन को हरियाणा की 360 अनुसूचित महापंचायत का समर्थन मिल गया है। हरियाणा में बहुजन समाज के उभरते हुए क्रन्तिकारी युवा नवाब सतपाल तंवर के गाँव खांडसा में रविवार 23 अक्टूबर को बहुजन महासम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें देश के अनेकों राज्यों से लोगों के पहुँचने की उम्मीद है। हरियाणा सहित पूरे भारत में अनुसूचितं जातियों पर हो रहे अत्याचारों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए इस महासम्मेलन में पूरे भारत से बहुजन समाज का आह्वान किया गया है। पिछले दिनों गाँव खांडसा की पंचायत ने नवाब सतपाल तंवर को अपना समर्थन दिया था। यह बात यहीं नहीं थमी, अब क्रांति की मुखर होती इस भीम ज्वाला को हरियाणा की 360 महापंचायत झाड़सा का भी सहयोग मिल गया है। आज तक के इतिहास में पहली बार है कि अनुसूचित जाति की महापंचायत ने अनुसूचित जातियों पर हो रहे अत्याचारों और सरेआम जातिसूचक शब्दों से अपमानित किये जाने के खिलाफ अपना सहयोग दिया है। अन्यथा समाज की पंचायतें सिर्फ मृतक बुजुर्गों के काज आदि तक ही सिमित रहती थी। आज सतपाल तंवर के सहयोग में हरियाणा की 360 पंचायत ने नयी मिसाल पेश करने की ठानी है। अनुसूचित जाति 360 पंचायत के चौधरी ओमप्रकाश झाड़सा ने बताया कि समाज में अत्याचारों की अति हो चुकी है। अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया की सितंबर में देश के कोने-कोने से गुड़गांव पहुंचे आंबेडकर के युवा बच्चों ने पूरे हरियाणा के जातिवादी सिस्टम को हिलाकर रख दिया था। चौ० ओमप्रकाश ने बताया कि जिस क्रांति की शुरुआत नवाब सतपाल तंवर ने समाज के साथ मिलकर की उसको आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है। बताया जा रहा है कि सितंबर शुरू की गयी इस बहुजन महाक्रांति की आग पूरे देश में फ़ैल रही है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अनुसूचित जाति के दो युवा लड़कों को जिन्दा जलाये जाने का मामला भी इस महाआंदोलन में गरमाएगा। बहरहाल देश के सैंकड़ों भीम सैनिक गुड़गांव पहुँचने के लिए कमर कस चुके हैं।
⁠⁠⁠⁠01:34⁠⁠⁠⁠⁠

⁠⁠इस देश में तीन वर्ण हैं

⁠⁠⁠⁠01:25⁠⁠⁠⁠⁠

Friday, August 19, 2016

गुजरात के आंबेडकरवादी ऊना आंदोलन की समीक्षा

मेरे कुछ बंधु और बहनें बुरा न मानें परंतु इस बात को समझें - अनुसूचित जाती, जनजाति और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के विरोध प्रदर्शनों को जल्द ही कांग्रेस और उसकी सहयोगी कोम्युनिस्ट द्वारा हाईजैक (चुरा) कर लिया जाता है। यही गुजरात के ऊना में भी हुआ। आज नए-नए नेता उभारे जा रहे हैं क्योंकि उनको इन संस्थाओं का स्पोर्ट (सहयोग) है। यह नेता इन संस्थाओं के एजंट होते हैं जो पहले तो अकेले होते हैं पर बाद में जमसमूह बना कर उन्हें इन संस्थाओं के हाथों बेच देते हैं। पंद्रह अगस्त की ऊना रैली से भी यही बातें उभर कर आ रही है कि मंच कांग्रेसियों के हाथों में था और साथ में कोम्युनिस्ट थे। ऐसे में असली मुद्दा समाप्त हो जाता है और नकली मुद्दे बना दिए जाते हैं जिससे कि राजनैतिक फायदे पहुंचे। और फिर इन पार्टियों के राज में भी अत्याचार जारी रहता है। कांग्रेस के शासनकाल में अधिक छात्रों ने आत्महत्या की पर तब राहुल गाँधी को याद नहीं आया। केरल में बौद्ध धर्मांतरण पर बानी फिल्म को बैन कर दिया गया पर तब कोम्युनिस्ट चुप रहे। उधर पश्चिम बंगाल दशकों से कोयुनिस्ट पार्टी और अब तृणमूल जैसी ऐसी पार्टियों के हाथों में है जिन्हें कृत्रिम ब्राह्मण, बेनर्जी, चटर्जी आदि चलाते हैं और मूलनिवासियों का दमन करते हैं। मैंने उन्हें कृत्रिम इसलिए बोला है क्योंकि वह ब्राह्मणों द्वारा मूलनिवासी भारतीय महिलाओं का शोषण करके बनाए गए हैं जिस प्रकार यूरोपियन लोगों ने ऑस्ट्रेलिया में वहां की मूलनिवासी महिलाओं को शोषण करके एक नई प्रजाति बनाई। इसलिए इस बात को समझने की आवश्यकता है कि इन सबमें कहीं मुद्दे की बात समाप्त न हो जाए। मैं कई बार कह चुका हूँ कि भावनात्मक बहाव में बहना सही नहीं। डॉ. भिमराव आंबेडकर ने अधिनायकवाद (किसी को हीरो बना कर पूजा करना) के लिए मना किया है पर उन्हीं की शिक्षाओं को तो लोग पढ़ते नहीं और कांग्रेस और कोम्युनिस्टों द्वारा खड़े किए गए नए अधिनायकों (हीरो) के पीछे भागने लगते हैं। इसी प्रकार लोग सरकारी अफसरों के पीछे भागते हैं और उन्हें भी किसी अधिनायक (हीरो) की संज्ञा दे देते हैं, फिर भले ही उन्होंने समाज के लिए काम काम किया हो पर समाज से लिया ज्यादा हो। इसलिए मैं बार-बार यही दोहराता हूँ कि अधिनायकवाद बंद करें। मुद्दे की बात करें। भेड़ की खाल में भेड़ियों को पहचाने। और भूले नहीं कि कोई किसी भी जाती का हो डॉ आंबेडकर की मूवमेंट को धोखा बहुतों ने दिया है। इसलिए सतर्क रहें। केवल मुद्दे की बात करें। सांस्कृतिक और धार्मिक क्रांति पर ज़ोर दें। अपने संगठनों का विस्तार करें। डॉ आंबेडकर के विचारों को आगे ले कर जाएं। एक हीरो के पीछे भागना बंद करें। आप जितना किसी के पीछे भागेंगे वो आपको उतना ही लूटेगा/लुटेगी। आज मुद्दा यह होना चाहिए था कि गाय काटने पर लगा बैन (प्रतिबन्ध) हटा देना चाहिए और सरकार द्वारा खड़े किए गए गाय बचाने वाले कमिशनों को समाप्त कर देना चाहिए जो गौ रक्षकों को सरकारी मदद करते हैं। पर मुद्दा बन गया कि पांच एकड़ ज़मीन चाहिए। आज मुद्दा यह होना चाहिए था कि इस संसार के उन सात सौ करोड़ लोगों की तरह हमें भी यह अधिकार होना चाहिए कि हम किसी भी पशु को पाल सके और काट कर खा या व्यापार कर सकें। पर मुद्दा बन गया कि उनको नहीं उठाएंगे अर्थात उनसे व्यवसाय नहीं करेंगे। भारत के कई राज्यों से गाय के काटने पर प्रतिबन्ध लगने के बाद करोड़ों अनुसूचित जाती / जनजाति / पिछड़े वर्ग और अलप संख्यक लोग न केवल बेरोजगार ही हो गए बल्कि जो आर्थिक रूप से सक्षम थे वह भी निर्धन हो गए। इसका फायदा हुआ हिन्दू बनिया को जो रेगसीन से ले कर प्लास्टिक तक चमड़े की जगह इस्तेमाल करने लगा। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी चमड़े के काम पर बड़ी चोट पहुंचाई यह कह कर कि उससे प्रदूषण फैलता है। पर क्या प्लास्टिक और अन्य पॉलिमर जिन्हें चमड़े की जगह इस्तेमाल किया गया उनसे प्रदूषण नहीं फैला? ब्राह्मणवाद की इस साजिश के शिकार हुए अनुसूचित जाती / जनजाति / पिछड़े वर्ग और अलप संख्यक लोगों ने तो मांस बेचना तक बंद कर दिया जो कि एक अच्छा व्यवसाय था। ऐसा माना जाता है कि गाय का मांस खाने से ही अछूतों (अनुसूचित जाती) में शारीरिक बल था। अंग्रेजों ने भी उन्हें अपनी सैना में भर्ती किया था क्योंकि उस समय गाय का मांस का सेवन करने से शारीरिक बल के साथ उनकी कद-काठी भी लंबी थी। ऐसी अनगिनत बातें हैं जिन्हें आपको समझने की जरुरत है। आपका मुद्दा क्या है, और वह किनके हाथों में है? आपको अधिनायक नहीं न्याय चाहिए। आपको मंच पर नेता नहीं, सही दिशा चाहिए। आपको चोला या झोला दिखा कर बेवकूफ बनने वाले नहीं बल्कि सूट-बूट वाले बुद्धिजीवी आंबेडकर और चाहिए। आपको जातपात या आरक्षण का लाभ दिखा कर मंत्री बननेवाले नहीं बल्कि आपको मानसिक रूप से उन्नत करने वाले चाहिए। आप किसी के पीछे भागना बंद करें। सम्मान करें डॉ आंबेडकर का जिन्होंने अधिनायकवाद का विरोध किया है। किसी की बातों में न आएं। अपनी बुद्धि एवं विवेक से काम लें। - जय भीम - निखिल सबलानिया
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डॉ. भिमराव आंबेडकर जी की कलर फोटो प्रिंट हुई (आगे-पीछे, दोनों तरफ) शानदार टीशर्टें प्राप्त करीए। अब तक पचास से ज्यादा संगठनों ने हमसे टीशर्ट बनवाई हैं। हापुड़ की बड़ी दौड़ और आज़मगढ की विशाल सभाओं में हमारी टीशर्ट्स ही गयी थी। जम्मू, कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल, राजस्थान (भीलवाड़ा और भरतपुर की विशाल रैलियां), उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और आसाम में हमारी टीशर्ट्स कई संघठनों ने अपने सदस्यों को पहनाई हैं। घर बैठे स्पीड पोस्ट से डाक द्वारा प्राप्त करें। पेमेंट अपने पास वाले बैंक में जमा करवा सकते हैं। चाहे तो सीधे दिल्ली से खरीद सकते हैं। तो आज ही आर्डर करें। संपर्क: मोबाईल : 8527533051, लैंडलाइन : 01123744243 (नोट: आने से एक दिन पहले फोन करके आएं। नज़दीक रामकृष्ण आश्रम मेट्रो, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन अथवा डॉ. आंबेडकर भवन, रानी झाँसी रोड़ से मात्र दो किलोमीटर दूरी पर। डॉ. आंबेडकर जी के पोस्टर (बहुत कम दाम पर, न्यूनतम पचास) और पुस्तकें (अच्छे डिस्टाउंट पर) भी उपलब्ध हैं।

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