Thursday, June 29, 2017

क्या भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आज़ाद रावण जी का एनकाउंटर करना चाहती थी पुलिस?

भीम आर्मी की दिल्ली रैली में स्वयं चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' जी ने कहा था
कि वह स्वयं पुलिस को गिरफ्तारी देंगे। ऐसा उन्होंने संसद मार्ग पर कहा जहाँ
दिल्ली पुलिस का सबसे अहम और खुफिया यंत्रों से लैस पुलिस थानों में से एक
स्थित है। फिर उनको वहीं गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया ? हो सकता हो कि वे
पुलिस के पास गए हों और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। फिर चंद्रशेखर
पंजाब जाते हैं और हर जगह की तस्वीरें और वीडियो सार्वजानिक करते हैं, पर क्या
पुलिस का खुफिया तंत्र इतना कमजोर है कि उसे इसकी भनक भी नहीं होती और
वह चंद्रशेखर जी को न केवल भगौड़ा ही बल्कि इनामी मुजरिम भी बना देते हैं ?
और फिर यह सब नाटक के बाद ही पुलिस उनको गिरफ्तार करती है।
आखिर पुलिस संसद मार्ग पर क्या सो रही थी ? जब चंद्रशेखर जी इतने बड़े मुजरिम
हो गए कि उन पर इनाम रखना पड़ा तो संसद मार्ग से ही उनको गिरफ्तार क्यों नहीं
किया गया ? इसका सीधा उत्तर यही दिया जा सकता है कि पुलिस और सरकार उनका
एनकाउंटर करना चाहती थी। इसके लिए सारी हिन्दू मीडिया के तंत्र से उनको बदनाम
कराया गया पर एक भी राजपूत का नाम नहीं आया जिन्होंने शब्बीरपुर में तलवारे और
गोलियां चलाई। पर बादाम केवल अनुसूचित जाति के व्यक्ति को ही किया गया। और
फिर यह साजिश रची गयी। यह प्राचीन षड़यंत्र है जो कि मूलनिवासी राजाओं के साथ
किया जाता रहा। महाराजा बलि, महिषासुर, और कई मूलनिवासी असुर राजाओं को ऐसे
ही छल और षड़यंत्र से मारा गया। कई प्राचीन स्थानों के नाम का संधि विच्छेद करें तो एक
शब्द असुर आता है। जैसे बिहार में गया - गयासुर (प्राचीन असुर राजा गयासुर के नाम पर),
ओडिशा में बालासुर, केरल में थ्रिसुर, कर्नाटक में मैसूर (असुर राज महिषासुर के नाम पर),
सूरत आदि। अब यह जानिए कि यह असुर क्या है। पहले समझिए कि सुर क्या है।
सुर का अर्थ है सूर्य। पर सुर का एक और अर्थ है अरबी भाषा में - ऊपर। तो सूर्य का
धरती के ऊपर होने का कारण उसे सुर कहा गया। भारत में सूर्य का प्रकाश अच्छा रहा
इसलिए यहाँ के लोगों को सूर्यवंशी कहा गया। पर सुर से असुर कैसे बन गया?
उत्तर यह है कि यह उन्हीं षडयंत्रकारियों ने बनाया जो आज चंद्रशेखर और जस्टिस कर्णन
के साथ षड्यंत्र रच रहे हैं। जब भारत में मूलनिवासी राजाओं को छल और षड़यंत्र से मार
दिया गया या पराजित कर दिया गया तो उनका स्टेटस (प्रतिष्ठा, सामाजिक स्थिति) ऊंचा
न रह कर नीचा कर दिया गया। सुर को असुर बना दिया गया। अब इस सूर्य की धरती के
मालिक वह नहीं रहे जो यहां राज करते थे। उन सुरों का अंत कर दिया गया। अंत + सुर = असुर।
सुर अर्थात ऊंचा और असुर अर्थात नीचा। यहाँ यह भी समझिए की सुर की पहचान किसने दी होगी ?
वे वही होंगे जो ऐसे क्षेत्रों से (यहाँ) आए हों जहाँ सूर्य की रौशनी कम है। (बाल गंगाधर तिलक
ने 1903 में प्रकाशित अपनी पुस्तक - द आर्कटिक होम इन द वेदास (वेदों में उत्तर ध्रुव का घर)
में वेदों के आधार पर बताया है कि ब्राह्मण दस हज़ार वर्ष पूर्व उत्तरीय ध्रुव से योरोप होते हुए
भारत में आए थे)। और जो असुर थे, अर्थात उन जगहों के वासी जहाँ सूर्य का प्रकाश कम था,
वे खुद को सूर्यवंशी कहलाने लगे। हो सकता हो कि राजा रामचंद्र भी उन्हीं विदेशियों के
वंशजों में से एक हो जो यहाँ के राजाओं को छल या षड्यंत्र से पराजित करके या मार के,
बाद में सूर्यवंशी कहलाए। तो इस प्रकार हिन्दू ग्रथों के समस्त सूर्यवंशी राजा असल में
असुर थे, अर्थात भारत के बहार के ठन्डे प्रदेशों के थे, और बाद में सुर राजाओं को छल
या षडयंत्र से पराजित या मार कर स्वयं को सूर्यवंशी कहलाने लगे। यदि राम सही में
सूर्यवंशी होते तो उनके नाम के साथ चंद्र (चाँद) नहीं लगा होता। क्योंकि चंद्र की कम
रौशनी होने के कारण उसे नीचा माना जाता रहा होगा। चाँद की कम रौशनी में जान को
ख़तरा रहता था। इसलिए चाँद के साथ डर जुड़ गया और चाँद अपनी भयावहता के लिए
चंड बन गया। इसलिए मौत देने वाले को चंडाल कहा गया, क्योंकि वह चाँद (चंड (चन्द्रमा)
ही था जिसकी उपस्थिति में जानवर और शत्रु आक्रमण करते थे)। पर प्रश्न यह है कि आखिर
चद्रवंशी कौन होंगे ? क्या वे सुर थे ? यदि वे असुर थे तो उन्हें चंद्रवंशी क्यों कहा गया ?
इसका सीधा उत्तर यह है कि वे भी वही थे जो बहार से आए थे। विशेषकर उन क्षेत्रों से
जहाँ सूर्य कम निकलता था। इसलिए उन्हें चंद्रवंशी कहा गया। पर उन्हीं में से जो भारत
के सुर राजाओं को पराजित करने या धोखा देने में कामयाब हो गए, उन्होंने यहाँ के
राजाओं की पहचान ले कर खुद को सूर्यवंशी बता दिया। पर असुरों को चंद्रवंशी
नहीं बताया जा सकता था। क्योंकि वे चंद्रवंशी नहीं थे। अर्थात वे बहार से, ठन्डे
प्रदेशों से आए नहीं थे। चंद्रवंशियों को भी असुर नहीं कहलाया जा सकता था क्योंकि
वे तो असल में नए सूर्यवंशियों के समूह के ही थे। शायद यही कारण है कि हिन्दू ग्रन्थ
सूर्यवंशी और चंद्रवंशियों की मित्रता और असुरों (असली सुरो, सूर्यवंशियों) के संघर्ष
से भरे हुए हैं। जैसे सूर्यवंशी राजा विश्वामित्र और वशिष्ठ। राम के नाम के साथ चंद्र
इसलिए ही लगा क्योंकि वे असल में चंद्रवंशी, असुर रहे होंगे। मैं इस लेख में यह
इसलिए लिख रहा हूँ, ताकि इतिहास को समझा जाए क्योंकि सैकड़ों और हज़ारों
वर्षों पुराना इतिहास आज फिर से दोहराया जा रहा है। एक तरफ न्यायालयों में
भ्रष्टाचार के खिलाफ तो सब बोलते हैं पर आवाज़ उठाने वाले अनुसूचित जाति के
जस्टिस कर्णन को ही बंदी बना दिया जाता है। वैसे तो अनुसूचित जाति के लोगों के
साथ अत्याचार होते रहते हैं पर आवाज़ उठानेवाले चंद्रशेखर को ही भगौड़ा बना कर
शायद एनकाउंटर करने की तैयारी की जा रही थी। ओह! बेशर्म लोगों ! ज़रा तो डरो
अपने इतिहास से ! क्यों इस भारत भूमि के मूलनिवासियों के खिलाफ ऐसे षड़यंत्र रचते हो ?
सुधर जाओ, संभल जाओ ! जनक्रांति की सुनामी में बह गए विश्व के सबसे ताकतवर गुंडे।
भगवन बुद्ध के मार्ग को अपनाओ। वही तुम्हारा कल्याण करेंगे। मैत्री और करुणा रखो।
मत करो यह सब। शायद तुम्हारे शरीर में हृदय है पर उस हृदय में प्रेम नहीं।
- लेखक - निखिल सबलानिया
(कृपया लेखक की अनुमति के बिना इस लेख को किसी भी पत्रिका, अखबार, टीवी,
पुस्तक आदि में प्रकाशित न करें) संपर्क : केवल ईमेल से sablanian@gmail.com
(विशेषाधिकार - निखिल सबलानिया प्रकाशन, दिल्ली)
(नोट - इस लेख में लेखक ने पहली बार सुर और असुर के सिद्धांत को एक अलग
तरीके से समझाया है और यदि यह सही है तो यह एक ऐतिहासिक लेख है।
आप भी लेखक के द्वारा उदघोषित किए विचार पर शोध करें और अपनी शोध
के आधार पर नए तथ्य लोगों तक पहुंचाएं)। 29/6/2017 लेखक की अन्य पुस्तकें







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Friday, January 6, 2017

एक जाति के गुलाम हो चुके हो!!!

आपको भी शर्म आ जाये......

ना शर्म आए तो समझो आप ने

एक जाति के गुलाम हो चुके हो!!!

1 - मोहन भागवत - ब्राह्मण  - आरएसएस प्रमुख

2 - नितिन गडकरी  (ब्राह्मण ) - पर्यटन मंत्री

3 - सुषमा स्वराज  (ब्राह्मण ) - विदेश मंत्री

4 -  अरुण जेटली (ब्राह्मण  ) - वित्त  मंत्री

5 - प्रकाश जावडेकर  (ब्राह्मण ) - शिक्षा  मंत्री

6 -रविशंकर प्रसाद  (ब्रहाण  ) - सुचना  मंत्री

7 -सुरेश  प्रभु  (ब्राह्मण ) - रेलमंत्री

8 -स्मृति ईरानी (ब्राह्मण)  - कपड़ा मंत्री

9- मनोहर पर्रिकर- ब्राह्मण- रक्षा मंत्री

10-कलराज मिश्र ( ब्राह्मण)   - मंत्री भारत सरकार

11 -मनोज तिवारी ( ब्राह्मण)  - प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली

12- सुधांशु त्रिवेदी  ( ब्राह्मण  )- राष्ट्रीय प्रवक्ता

13 -संबित पात्रा   ( ब्राह्मण  )- राष्ट्रीय प्रवक्ता

14 -श्रीकांत शर्मा ( ब्राह्मण)   - राष्ट्रीय प्रवक्ता

15-किशोर उपाध्याय  (ब्राह्मण ) - राष्ट्रीय प्रवक्ता

16 -रघुवर दास (ब्राह्मण ) - झारखंड सीएम

17 -देवेन्द्र फड़नवीस (ब्राह्मण) - महाराष्ट्र सीएम

18 जयंती नटराजन(ब्राह्मण)- राज्य मंत्री

18 किरण रिजूज ( ब्राह्मण) - राज्य मंत्री

19 -नृपेन्द्र मिश्र  (ब्राह्मण  ) - मुख्य सचिव पीएम

18 -मुकुल रोहतगी  (ब्राह्मण ) - अटार्नी जनरल

19 -मेनका गाँधी  (ब्राह्मण) - राज्य मंत्री

20 -डा महेश शर्मा  (ब्राह्मण ) - राज्य मंत्री

21 बाबुल सुप्रियो  - ब्राह्मण-  राज्य मंत्री

और अब
विपिन रावत-  ब्राह्मण-  थलसेना प्रमुख

वाह रे हिन्दु हिन्दू का नाम जपने वाले .......

अब देश के ब्रह्म के घर जब बच्चा पैदा होगा तो डाक्टर कहेगा

'बधाई हो कैबिनेट मंत्री  हुआ है'

( देश मे से चुने गए 44 जजो  में 34 ब्राह्मण है!!

Kya mehnt krege aap hm hi bta dete h ............. :

पिछले सालों में उनके वायदे और उपलब्धियाँ

👉कब धारा -370 हटेगी ?
👉कब जवानो की शहादत रुकेगी?
👉कब माल्या घर आयेगा?
👉कब दाऊद जेल जाएगा?
👉कब 15 लाख मिलेगे ?
👉कब दो करोड़ रोजगार मिलेगे ?
👉कब किसान की एमएसपी बढेगी ?
👉कब किसान की आत्महत्या रुकेगी ?
👉कब तक गरीब भूखा सोयेगा ?
👉कब तक दलित डर से रोयेगा?
👉कब गौहत्या बैन होगी?
👉कब कालाधन मालिक रोयेगा?
👉कब भ्रष्टाचार रुकेगा?
👉कब अबला की पीर घटेगी?
👉कब शिवराज, रमन सिंह
पंकजा, वसुंधरा, सुषमा
भ्रष्टाचारी जेल जायेगे? 🙏🏻
बैकलॉग की भर्ती पर रोक व अन्य पिछले दो सालों में विज्ञापन तो बहुत निकले और नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों रुपये

भी लूटे गए पर आज तक कोई
भी भर्ती पूरी नही हो पायी ……


केन्द्र सरकार पूरे होते वादे ….

इस सरकार की कामयाबी को छिपाओ नहीं सभी लोगो को शेयर

करे !!!

पद्म भूषण और पद्म विभूषण भारत रत्न सम्मान

केंद्र  सरकार द्वारा दिया जाने वाला पुरस्कार 2016-17

1.रजत शर्मा  (ब्राह्मण )

2.अनुपम खेर  (ब्राह्मण )

3. उदित नारायण  ( ब्राह्मण)

4.सुधीन्दर मेमन  ( ब्राह्मण)

5.श्री रविशंकर प्रसाद  ( ब्रहाण)

6.यामिनी कृष्ण मूर्ति  ( ब्राह्मण)

7.अविनीश दिक्षित  ( ब्राह्मण)

8.विश्वनाथन शांता  ( ब्राह्मण)

9 . अश्विनी तिवारी ( ब्राह्मण)

10-Ajay Devgn ( ब्राह्मण)

11- Bhikhudan GadhvSupakar ( ब्राह्मण)

12- Prathibha Prahlad ( ब्राह्मण)

13- Tulsidas Borkar ( ब्राह्मण)

14- Soma Ghosh ( ब्राह्मण)

15- Nila Madhab Panda( ब्राह्मण)

16- S.S. Rajamouli ( ब्राह्मण)

17- MadhurBhandarkar ( ब्राह्मण)

यक्ष प्रश्न? क्या देश में अब
ब्रहाण ही बचे हैं
जो सम्मान के योग्य हैं!

ब्राह्मण की आबादी भारत मे 3% है

मगर इन्होने 97% को गुलाम बनाकर रखा है!!

इनको ब्राह्मण के अलावा कोई नहीं मिल रहा है।

इस message को जितना हो सके share करे।

और बताये की हम कितने अच्छे voters है ll

और समझाये कैसे हम एक जाति के गुलाम है!!!

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Monday, November 28, 2016

छूने तक का अधिकार देने को तैयार नहीं

*झाँसी: कलराज ने मंच पर की केशव मौर्या की बेइज्जती*

झाँसी में परिवर्तन रैली में भाजपा नेताओं ने परिवर्तन का आह्वान करने के साथ-साथ प्रदेशाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या की अच्छी-खासी बेइज्जती कर दी। मंच पर जब सारे नेता एकजुटता का संदेश देने के लिए खड़े होकर एक दूसरे का हाथ पकड़कर उठाने लगे तो केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्रा ने केशव प्रसाद मौर्या का हाथ ही झटक दिया। मंच पर हुई बेइज्जती से अकबकाए केशव मौर्या को जब कारण समझ नहीं आया तो कलराज मिश्रा ने डाँटकर उनसे दूर रहने की हिदायत दे दी।

दरअसल, केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा इस बात पर ध्यान लगाए रहे कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उनके ही बगल में रहें। इसमें तो वे कामयाब रहे लेकिन वे यह नहीं देख पाए कि उनकी दूसरी तरफ  कोई राष्ट्रीय या ब्राह्मण नेता नहीं, बल्कि केशव प्रसाद मौर्या ही आ गए हैं।

इसके बाद जब उत्साहित होकर सभी नेता एक दूसरे का हाथ पकड़कर एकजुटता का संदेश देने लगे तो अपने को बड़ा नेता मानने की गफलत में पड़े केशव मौर्या ने बगल में खड़े कलराज मिश्रा का हाथ पकड़कर ऊपर उठाने की कोशिश की। जब कलराज ने देखा कि केशव प्रसाद मौर्या उनका हाथ पकड़कर रहे हैं, तो वे बुरी तरह बिफर गए। उन्होंने गुस्से और हिकारत से केशव का हाथ झटक दिया, और डाँट दिया। 

मजबूर होकर केशव को अपनी झेंप मिटाने की कोशिश करते हुए अपना एक ही हाथ ऊपर करना पड़ा। मंच पर मौजूद नेताओं का तो इस घटना पर उस समय ध्यान नहीं गया, लेकिन नीचे से सब देख रहे लोगों को ये घटना बहुत बुरी लगी।

केशव प्रसाद मौर्या एक ओर जहाँ अपने को प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं, और इस बहाने कुशवाहा, मौर्या वोटों को लुभाने में लगे हैं, वहीं ब्राह्मणी संस्कृति में पले-बढ़े कलराज मिश्रा उन्हें छूने तक का अधिकार देने को तैयार नहीं हुए, और मंच पर ही उनकी बेइज्जती कर बैठे।

अगले दिन जब अखबारों में तस्वीर और खबर छपी, तो केशव प्रसाद मौर्या को अपनी बेइज्जती का अहसास हुआ, लेकिन वो अब कुछ करने की स्थिति में नहीं रहे। भाजपा के सवर्ण नेताओं ने भी इसे सामान्य घटना मानकर इसकी अनदेखी कर दी है।

रैली में कुशवाहा और अन्य ओबीसी नेताओं का भी पर्याप्त अपमान हुआ। प्रतिष्ठित नेता हरगोविंद कुशवाहा को कुछ ही दिन पूर्व बहुजन समाज पार्टी छोड़कर भाजपा में आए थे, लेकिन उन्हें भी कोई तवज्जो नहीं दी। खास बात ये है कि बुंदेलखंड में कुशवाहा समाज की संख्या काफी है, और वो जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र नारायण सिंह यादव का कहना है कि स्थानीय कुशवाहा समाज के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी कुशवाहा और ओबीसी समाज में इस घटना को लेकर काफी नाराजगी और अपमान की भावना देखी जा रही है।  बाबूसिंह कुशवाहा के जनाधिकार मंच के कार्यकर्ता सबसे तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं और कह रहे हैं कि भाजपा में कुशवाहा नेताओं का अपमान हो रहा है।

हालाँकि, खुद केशव प्रसाद मौर्या भी अपनी ही पार्टी के दलित नेताओं का अपमान करते रहे हैं। पिछले दिनों सोनभद्र जिले में वे भाजपा के दलित सांसद छोटेलाल खरवार की अच्छी-खासी बेइज्जती कर चुके हैं। इस खबर के अखबारों में आने के बाद और अपमानित छोटेलाल खरवार की तस्वीरें वायरलहोने के बाद भाजपा की अच्छी-खासी बेइज्जती हुई थी। सोशल मीडिया पर भी भाजपा की अच्छी-खासी फजीहत हुई थी।

पत्रकार महेंद्र नारायण सिंह यादव ने पूरे घटनाक्रम पर व्यंग्य करते हुए फेसबुक  पर लिखा है- "ओबीसी होकर ब्राह्मण को छूते हो? पंडितजी को अपवित्र कर दिया! सर्दी के दिनों में पंडित जी को तुरंत नहाना पड़ गया होगा! "75" साल पारकर चुके पंडित जी ठंड लग जाए तो कौन जिम्मेदार होगा?  बड़े आए मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले, दूर हटो

Saturday, November 26, 2016

आरक्षण की समीक्षा

[10/20, 10:51 AM] ‪+91 92001 42243‬: आजकल जहाँ भी दो चार जनरल केटेगरी वाले इक्कठे बैठते हैं वहाँ एक ही चर्चा होती है कि इस आरक्षण ने देश को बर्बाद कर दिया है, अब तो सभी बराबर हो गए हैं कोई जातिवाद नहीं है इसलिए अब इस आरक्षण को खत्म कर देना चाहिए।

अफशोस की बात यह की हमारे कई नेता भी बोलने लगे हैं कि आरक्षण की समीक्षा होती है तो क्या बुरा है।

जिन लोगों को सब कुछ ठीक ठाक लग रहा है और कहीं भी जातिवाद नजर नहीं आता है उनको आह्वान किया जाता है कि आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ।

आओ चलें ईंट भट्ठों पर और देखो वहाँ जो ईंट पाथ रहें हैं या पक्की हुई ईंटों की निकासी कर रहे हैं जिनमें पुरुषों के साथ साथ उतनी ही संख्या में महिलाएं भी दिखाई दे रही हैं उनमें ब्राह्मण, राजपूत और बणिया कितने हैं ?

इसका जवाब यही होगा कि इनमें तो उन समाजों का एक भी व्यक्ति नहीं है तो फिर यह जातिवाद नहीं है तो फिर क्या है ?

अब आगे चलो मेरे साथ शहरों की गलियों में और ध्यान से देखो जो महिलाएं सड़कों पर झाड़ू लगा रही हैं और गंदी नालियाँ साफ कर रही हैं उनमें कितनी ब्राह्मणी, ठुकराईंन और सेठाणी जी दिखाई दे रही हैं ?

यहाँ भी वही जवाब की इनमे तो ब्राह्मणी, ठुकराएंन और सेठाणी एक भी नहीं है तो यह जातिवाद नहीं है क्या ?

अब आओ चलते हैं रेलवे स्टेशन, हमारे देश में कई हजारों की संख्या में रेलवे स्टेशन बने हुए हैं वहाँ जो रेलवे लाइनो पर शौच के ढेर के ढेर लगे हुए रहते हैं उनको रातों रात साफ करने के लिए पंडित जी आता है या सिंह साहब या फिर शाहूकार जी सेवा देते हैं।

इसका भी वही जवाब मिलेगा की उनमे से तो एक भी नहीं आता है तो फिर क्या यह जातिवाद नहीं है ?

अब रूख करते हैं भवन निर्माण कार्य करने वाले मिस्त्री और मजदूरों की ओर, जो पूरे दिन अपना हाथ चलाते रहते हैं जिन्हें मिस्त्री कहते हैं और जो पूरे दिन सिर पर काठड़ी ढोने में लगे रहते हैं उन्हें मजदूर कहा जाता है वैसे वे मजदूर नहीं बल्कि मजबूर हैं क्योंकि 50 डिग्री तापमान में कोई कूलर की हवा खा रहा होता है तो कोई ऐ सी में मौज कर रहा होता है उस वक्त भी ये लोग तेज गर्मी और लू के थपेड़े खा रहे होते हैं, अब इनमे भी नजर दौड़ाते हैं तो उनकी संख्या नदारद मिलती है तो क्या यह जातिवाद नहीं है क्या ?

अब अपना ध्यान जगह जगह बोरी बिछाकर बैठे हुए उन लोगों की ओर लेकर जाओ जो जूता पॉलिश करते हैं या जूतों की मरमत करते हैं उनमें पंडित जी और उनके साथियों की भागीदारी कितनी है, जवाब मिलेगा बिलकुल शून्य, तो पूरा का पूरा तो जातिवाद भरा पड़ा है ।

अब आजाओ बाजारों की ओर चारों ओर जो बड़े बड़े मॉल और बड़ी बड़ी दुकाने दिखाई दे रही है उनका मालिक कोई एस सी समाज वाला भी है या नहीं ?

यहाँ एकदम से ही पासा पलट गया है अब यहां एस सी का एक भी बन्दा नजर नहीं आएगा और सभी पर ब्राह्मण और बनिया व राजपूत का कब्जा मिलेगा।

अब सभी मिलकर सोचो कि क्या यह जातिवाद नही है ?

बिलकुल यह खुलं खुला जातिवाद हैं।

अब मंदिरों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहना चाहता हूँ कि मंदिरों में कितने पुजारी ब्राह्मण के अलावा देखने को मिलते हैं, शायद एक भी नहीं । क्या इसे आप जातिवाद नहीँ समझते हो।

आज भी हर कदम पर जातिवाद का जहर भरा हुआ है और लोग कहते हैं कि अब कोई जातिवाद नहीं है अब आरक्षण खत्म कर दिया जाना चाहिए।

आरक्षण होते हुए भी उच्च पदों पर हमारे समाज के लोगों को पहुंचने से रोका जाता है यदि जिस दिन आरक्षण खत्म हो जायेगा उस दिन से तो जातिवाद और अधिक पढ़ जायेगा ।
इसलिये जो ऐसी बात करता है उसे कहो कि आओ मेरे साथ तुम्हेँ जातिवाद दिखाता हूँ ।

.....भारत में 3% ब्राह्मण .....
**********************
3% लोगों का हिस्सा देखिये....

लोकसभा में ब्राह्मण : 48 %
राज्यसभा में ब्राह्मण : 36 %
ब्राह्मण राज्यपाल : 50 %
कैबिनेट सचिव : 53 %
मंत्री सचिव में ब्राह्मण : 64%
अतिरिक्त सचिव ब्राह्मण : 62%
पर्सनल सचिव ब्राह्मण : 70%
यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण वाईस
चांसलर : 61%
सुप्रीम कोर्ट में ब्राह्मण जज: 85%
हाई कोर्ट में ब्राह्मण जज : 70 %
भारतीय राजदूत ब्राह्मण : 51%
पब्लिक अंडरटेकिंग ब्राह्मण :
केंद्रीय : 67%
राज्य : 82 %

बैंक में ब्राह्मण : 67 %
एयरलाइन्स में ब्राह्मण : 61%
IAS ब्राह्मण : 72%
IPS ब्राह्मण : 61%
टीवी कलाकार एव बॉलीवुड : 83%
CBI Custom ब्राह्मण 72%
यदि हमारा आरक्षण गलत है और उसका सवर्णों के द्वारा विरोध किया जाता है! तो ये क्या है इसका विरोध आज तक किसी ने क्यो नही किया गया ? कहाँ छुपे हैं आरक्षण विरोधी लोग।
एससी-एसटी और ओबीसी को जो आरक्षण मिला है वह जनसंख्या के अनुपातिक आधार पर मिला है जिसके तहत SC & ST को 22.5% नौकरी और राजनीति में मिला है।ओबीसी की जनसंख्या 60%है जबकि आरक्षण केवल 27%मिला है । निम्न सारणी पर ध्यान दें ।
जनसंख्या आरक्षण प्रतिशत
एस सी 15 % 15 %
एस टी 7.5 % 7.5 %
ओबीसी 60 % 27 %
_______________________

योग 85 % 49.5% _______________________
अाज 60% ओबीसी समाज को 69 वर्षों में केवल 5% ही भर सका है।
SC, ST, OBC, MINORITY's जनसंख्या 85% और आरक्षण 49.5%
General castes जनसंख्या
15% और आरक्षण 50.5%
अब इस आंकड़ा को देख कर बताइए की वास्तविक में आरक्षण कौन ले रहा है? कुल मिला कर इस देश में मनुवादी ब्यवस्था आज भी कायम है। इसे कायम रखने वाले यहाँ की मनुवादी सरकारें है। जिन्होंने बारी बारी इस देश में 70 सालों तक राज किया । और अपनी ब्यवस्था को कायम रखने के लिए अपनी कूटनीति के तहत हमें आपस में लडाते रहते हैं और हमारे आरक्षण का विरोध करते हैं ताकि उनको मिल रही आरक्षण की ओर हमारा ध्यान ना जा सके। पर दुःख की बात तो यह है कि हमारे अपने ही लोग ढाल बन कर इनका साथ देते हैं जिसे मै अज्ञानी और मुर्ख के अलावा और कुछ नही कह सकता है।
: 👉 *मायावती ने मात्र 600 करोड़ में भारत के संविधान निर्माता का स्मारक _"अम्बेडकर पार्क"_ क्या बनाया पूरा मीडिया और विरोधी दिन रात  चिल्लाते रहे*।

1.जबकि कारीगर भी भारतीय थे।
2.रोजगार भी भारतीयों को मिला।
3.मैटेरियल भी भारत का ही था।
4.निर्माण शैली भी भारतीय  ही थी।
5.राज्य सरकार को स्मारक से राजस्व भी मिला।

गर्व से हम कह सकते हैं, *भारतीयों द्वारा*, *भारत में    निर्मित*

👉 *जबकि BJP सरकार 2500 करोड़ की सरदार पटेल की मूर्ति लगवा रही है वो भी _"मेड इन चीन"_*

1.जिस चीन ने आतंकवाद पर भारत का विरोध किया।
2.जो चीन आतंकवाद पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है।
3.जिस चीन ने भारत के लिए पानी बन्द कर किया
4.जो चीन हमारे देश की जमीन हडपे हुए है।
5.जो चीन बात बात पर भारत को आंखे दिखाता है।

*तो उस चीन को इतना बडा आर्थिक लाभ क्यूँ*?

*लेकिन इस पर सारा मीडिया*, *पूरा देश खामोश है।*

*तो ऐसे में देश की जनता  चीनी सामान के बहिष्कार को कैसे गम्भीरता से लें*?

दीपावली की मीमांसा

🔥दीपावली🔥 मीमांसा

लेखक✍-सुनील

हम बचपन से स्कूली किताबों और अखबारों में पढते आएँ हैं कि दीपावली राम के वन से घर आने की खुशी में मनाई जाती है और विजयादशमी रावण को मारने की खुशी में।
क्या आप भी इसे सच मानते हैं?
यदि हाँ
फिर तो मुझे यह कहते हुए बड़ा दुःख होगा कि आप भेड़ वृति के हैं।
बुरा न माने
अपने ग्रंथों को उठाकर देखें।
पढना बड़ा भारी काम होता है चलो मैं ही बता देता हुँ।
चैत्रः श्रीमानयं मासः पुण्यः पुष्पितः कानन:।
यौवराज्याय रामस्य सर्वमेवोपकल्प्यताम्।।
-वाल्मिकी रामायण अयोध्या काण्ड ३/४
अर्थ-यह चैत्र मास बड़ा सुंदर और पवित्र है इसमें सारे वन उपवन खिल उठे हैं इस समय राम का युवराज पद पर अभिषेक करने के लिए सब सामग्री एकत्र कराईए।

श्व एव पुष्यो भविता श्वोभिषेच्यस्तु मे सुतः।
-अयोध्या कांड ४/२
अर्थ-कल ही पुष्य नक्षत्र होगा अतः मेरे पुत्र का कल ही अभिषेक होगा।

और पाठकों आपको पता है राम अगले दिन १४ वर्ष के वनवास को चले गए थे।
१३ वर्ष तक कुशल रही और १४ वें वर्ष परेशानियाँ आनी शुरू हुई।

सीता हरण के बाद जब हनुमानादि खोज में निकले तब अंगद कहता है-
वयमाश्व युजे मासि काल संख्या व्ययस्थिताः।
प्रस्थिता सोपिचातीतः किमतः कार्यमुत्तरम्।।
-किष्किंधा कांड सर्ग५३/९
अर्थ-सीता की खोज में हम आश्विन मास बीतते बीतते निकले थे किंतु यह तो यहीं निकल गया।अब हमें आगे क्या करना चाहिए।

पाठकों देखिए सीता की खोज में ही आश्विन मास निकल गया और हिंदू आश्विन मास में ही रावण का वध करवा डालते हैं।

सीता सुंदर कांड सर्ग ३७/8 में हनुमान से कहती है-"वानर!यह दसवाँ महीना चल रहा है"
मतलब चौदहवें वर्ष का पौष का महीना।

इसी कांड के ४०/१० में सीता कहती है-"राजकुमार शत्रुसूदन!मैं आपकी प्रतिक्षा में एक मास जीवित न रह सकूँगी।"
अर्थात् अभी फाल्गुन मास चल रहा है।

एक मास निकल जाने के बाद राम रावण युद्ध होता है और युद्ध कांड ९२/६८ में लिखा है-
अभ्युत्थानं त्वमद्यैव कृष्णपक्ष चतुर्दशी।
कृत्वा निर्याह्यमावस्यां विजयाय क्लैर्वृतः।।
अर्थ-आज कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है आज तैयारी करके कल अमावस्या के दिन युद्ध के लिए प्रस्थान करो।

देखिए मित्रों १४ वाँ वर्ष बीत जाने पर अर्थात् चैत्र मास की अमावस्या को राम रावण युद्ध हुआ फिर हिंदू आश्विन में रावण क्यों जलाते हैं राम का विजया दशमी से क्या संबंध है?

रावण को मारने के बाद नव वर्ष लग गया।
पूर्णे चतुर्दशे वर्षे पंचभ्यां लक्ष्मणाग्रजः।
भरद्वाजाश्रमं प्राप्य ववन्दे नियतो मुनिम्।।
-युद्ध कांड १२४/१
अर्थ-राम ने 14 वर्ष पूर्ण होने पर पंचमी तिथि को भारद्वाज आश्रम में पहुंचकर मन को वश में रखते हुए मुनि को प्रणाम किया।
अर्थात् चैत्र शुक्ल पक्ष पंचमी को।

और इसी कांड के १२५/३ में राम हनुमान को भरत के पास जाकर अगले दिन राम के आने का संदेश देने को कहते हैं।

हनुमान भरत से कहते हैं-"हे भरत!किष्किंधा से गंगा तट पर आकर वे प्रयाग में भारद्वाज मुनि के समीप ठहरे हैं। कल पुष्य नक्षत्र के योग में बिना किसी विघ्न बाधा के आप राम का दर्शन करेंगे।

तो मित्रों इस प्रकार राम अगले दिन यानी चैत्र शुक्ल षष्ठी को अयोध्या लौटते हैं उसी पुष्य नक्षत्र में जिसमें वन को गये थे।
तो फिर हमें क्यों पढाया जाता है कि राम कार्तिक अमावस्या के दिन अयोध्या आये थे जिसकी खुशी में दिपावली मनाई जाती है।

न तो विजयादशमी को रावण मारा गया न कार्तिक अमावस्या को राम घर लौटा।

सच तो यह है विजया दशमी बौद्धों का त्यौहार है और दीपावली बुद्ध काल में भी यक्ष रात्रि के नाम से मनाया जाता था जिसका एक प्रमाण यह है कि इस दिन यक्षराज कुबेर की पूजा होती है।

लक्ष्मी की पूजा करते समय हिंदू यह बात नहीं जानते की लक्ष्मी की मूर्ति का विकास बुद्ध की माता महामाया की मूर्ति से ही हुआ है।

मेरा उद्देश्य तो मात्र हिंदुओं की भूल का प्रतिकार करना है ताकि विजयादशमी और दिपावली जैसे प्राचीन त्यौहारों के मूल का ज्ञान हो और कल्पित रामायण से इनका पीछा छूटे।

लेखक-✍सुनील
📞9166862313

भारत देश के एक मात्र राष्टपिता ,लोकमान्य ओर महात्मा जोतीराव फुले है

महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले  19वीं सदी के एक महान भारतीय विचारक, समाज सेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिय इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे।

ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति आधारित विभाजन और भेदभाव के खिलाफ थे।
उन्होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1851 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। उच्च वर्ग के लोगों ने आरंभ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।
विद्यालय की स्थापना
ज्योतिबा की संत-महत्माओं की जीवनियाँ पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1851 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। उच्च वर्ग के लोगों ने आरंभ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।
महात्मा की उपाधि
दलितों और निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने 'सत्यशोधक समाज' स्थापित किया। उनकी समाजसेवा देखकर 1888 ई. में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी। ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरंभ कराया और इसे मुंबई हाईकोर्ट से भी मान्यता मिली। वे बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे। अपने जीवन काल में उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं- तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, ब्राह्मणों का चातुर्य, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत. महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया. धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी

भारत देश के एक मात्र राष्टपिता ,लोकमान्य ओर महात्मा जोतीराव फुले है

जय भारत

क्या था साईमन कमीशन?

क्या था साईमन कमीशन?

जब बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर विदेश से पढकर भारत में बडौदा नरेश के यहां नौकरी करने लगे तो उनके साथ बहुत ज्यादा जातिगत भेदभाव हुआ। इस कारण उन्हें 11 वें दिन ही नौकरी छोड़कर बडौदा से वापस बम्बई जाना पड़ा। उन्होंने अपने समाज को अधिकार दिलाने की बात ठान ली।

उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को बार-बार पत्र लिखकर depressed class की स्थिति से अवगत करवाया और उन्हें अधिकार देने की माँग की।
बाबा साहेब के पत्रों में वर्णित छुआछूत व भेदभाव के बारे में पढकर अंग्रेज़ दंग रह गए कि क्या एक मानव दूसरे मानव के साथ ऐसे भी पेश आ सकता है। बाबा साहेब के तथ्यों से परिपूर्ण तर्कयुक्त पत्रों से अंग्रेज़ी हुकूमत अवाक् रह गई और 1927 में depressed class की स्थिति के अध्ययन के लिए मिस्टर साईमन की अध्यक्षता में एक कमीशन का गठन किया गया।

जब कांग्रेस व मो.दा.क.चं. गांधी को कमीशन के भारत आगमन की सूचना मिली तो उन्हें लगा कि यदि यह कमीशन भारत आकर depressed class की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर लेगा तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर अंग्रेजी हुकूमत इस वर्ग के लोगों को अधिकार दे देगी। कांग्रेस व मो.दा.क.चं. गांधी ऐसा होने नहीं देने चाहते थे।
अतः 1927 में जब साईमन कमीशन अविभाजित भारत के लाहौर पहुंचा तो पूरे भारत में कांग्रेस की अगुवाई में जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन हुआ और लाहौर में मिस्टर साईमन को काले झंडे दिखा कर go back के नारे लगाए गए। बाबा साहेब स्वयं मिस्टर साईमन से मिलने लाहौर पहुंचे और उन्हें 400 पन्नों का प्रतिवेदन देकर depressed class की स्थिति से अवगत कराया। कांग्रेस ने मिस्टर साईमन की आँखों में धूल झोंकने के लिए उनके सामने ब्राह्मणों को depressed class के लोगों के साथ बैठ कर भोजन करवाया (बाद में ब्राह्मण अपने घर जाकर गोमूत्र पीकर उससे नहाये)। यह सब पाखण्ड देखकर बाबा साहेब मिस्टर साईमन को गांव के एक तालाब पर ले गये। उनके साथ एक कुत्ता भी था। वह कुत्ता अपने स्वभाव के मुताबिक सबके सामने उस तालाब में डुबकी लगाकर नहा कर बाहर आया। तब बाबा साहेब ने एक depressed class के व्यक्ति को तालाब का पानी पीने के लिए कहा। उस व्यक्ति ने घबराते हुए जैसे ही पानी पीया, आसपास के ब्राह्मणों ने हमला बोल दिया। आखिरकार बाबा साहेब सहित अन्य व्यक्तियों को पास की एक मुस्लिम बस्ती में शरण लेकर अपना बचाव करना पड़ा। मिस्टर साईमन को सब कुछ समझ में आ गया। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को वस्तु स्थिति रिपोर्ट सौंप दी। बाबा साहेब भी बार-बार पत्राचार करते रहे और उन्होंने लंदन जाकर अंग्रेजी हुकूमत के वरिष्ठ अधिकारियों व राजनेताओं को बार-बार भारत की depressed class को अधिकार देने की मांग की।

बाबा साहेब के तर्कों को अंग्रेजी हुकूमत नकार नहीं सकी और उसने भारत की depressed class को अधिकार देने के लिए 1930 में communal award (संप्रदायिक पंचाट) पारित किया।
हमें विद्यालय में यह पढाया गया था कि कांग्रेस ने साईमन कमीशन को काले झंडे दिखा कर go back के नारे लगाए। परंतु उसने वास्तव में ऐसा क्यों किया, यह नहीं पढाया गया।