Friday, October 21, 2016

क्रांति और प्रतिक्रांति" - भारत का इतिहास

 *"क्रांति और प्रतिक्रांति"*
--- *भारत का इतिहास*

बाबासहाब डा. भीमराव अम्बेड़करजी ने भारत के इतिहास का जब गहराई से अध्यन किया तो बताया कि *"भारत का इतिहास विदेशी युरेशियन ब्राह्मणों की विसमतावादी और बुद्ध की मानवतावादी विचारधारा के बीच क्रांति और प्रतिक्रांति के संघर्ष का इतिहास रहा है ।"*

*सिंधु सभ्यता, मोहन जोदड़ो, हड़प्पा भारत की फली-फूली सभ्यताएं थी इन सभ्यताओं में रहने वाले लोग दैत्य, अदित्य, सूर, असूर, राक्षस, दानव कहलाते थे । तथा इनमें किसी प्रकार का जाति भेद नहीं था, इनकी संस्कृति मातृसत्तात्मक थी ।*


  करीब चार हजार साल पहले जब खेबर दर्रे से होते हुए मध्य एशिया से 'युरेशियन ब्राह्मण' आये तो यहाँ के मूलनिवासी अनार्य कहलाने लगे । आर्य और अनार्यों में करीब पांचसौ वर्ष तक संघर्ष चला जिसमे अनार्यों का पतन हुआ परिणामस्वरूप आर्यों ने अपनी पितृसत्तात्मक संस्कृति और विसमता वादी वर्ण व्यवस्था अनार्यों पर थोप दी, इस युग को इतिहास में आर्य वैदिक युग कहा गया हैं ।

आर्य लोगो में त्रिवर्णीय व्यवस्था ( ब्राह्मण/क्षत्रिय/वैश्य ) विकसित हो चुकी थी । जिसका विवरण ऋग्यवेद में मिलता हैं जब अनार्यों को हराकर गुलाम बनाया तो इन्हें वर्ण व्यवस्था में रखने के लिए चतुर्थ वर्ण ( शूद्र ) की रचना की गयी जिसका विवरण पुरुषशुक्त में मिलता हैं ।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मूलनिवासी अनार्य हमेशा आर्यों के गुलाम बने रहे, अनार्यों को आर्यों ने शिक्षा/सत्ता/सम्पत्ति/सम्मान आदि मूल अधिकारों से वंचित किया तथा शूद्र ( सछूत ) और अतिशूद्र ( अछूत ) के तौर पर बांट कर इनमें उंच-नीच की भावना पैदाकर आपस में लड़ाते रहे । धीरे-धीरे आर्य ब्राह्मणों ने इन्हें जाति - उपजाति में बांटकर ऐसे अंधविश्वास के जाल में उलझाया कि मूलनिवासी अनार्य शूद्र ( OBC /SC /ST ) आर्य ब्राह्मणों के षड़यंत्रो को समझ ही नहीं पाये ।

आर्यों की अमानवीय विषमतावादी व्यवस्था को गौतम बुद्ध ने अपनी वैज्ञानिक सोच और तर्कों से ध्वस्त कर दिया तथा समाज में ऐसी चेतना फैलाई कि ब्राह्मण और ब्राह्मणी संस्कारों का लोगो ने बहिष्कार कर दिया ।

बुद्ध को ब्राह्मणों ने शुरुआत से ही नास्तिक माना हैं । ब्राह्मणों के शास्त्रों में लिखा भी गया है कि जो अपने जीवन में तर्क का इस्तेमाल करता हैं वह नास्तिक हैं और जो धर्म और ईश्वर में विश्वास रखे वह आस्तिक । रामायण में बौद्धों की नास्तिक कहकर निंदा की गयी हैं ।


 बुद्ध का धम्म कोई धर्म नहीं बल्कि नैतिक सिद्धांत हैं । संक्षेप में कहे तो 'बुद्ध' का मतलब बुद्धि, 'धम्म' का मतलब 'इंसानियत' और संघ का मतलब 'इस उद्देश्य के लिए संघर्ष कर रहा सक्रीय संगठन' हैं ।

परन्तु बेहद दुःख की बात हैं कि बौद्ध सम्राट अशोक के पौत्र मौर्य सम्राट राजा बृहद्रथ की पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या कर बौद्धों के शासन को खत्मं किया और बौद्धों पर तरह-तरह के ज़ुल्म ढहाए गए, वर्णव्यवस्था जो बुद्ध की क्रांति की वजह से खत्म हो गयी थी । उसे मनुस्मृति लिखवाकर पुनः ब्राह्मणी शासन द्वारा तलवार के बल पर थोपी गयी, जिन बौद्धों ने इनके अत्याचारों की वजह से ब्राह्मण धर्म ( वर्णव्यस्था ) को स्वीकार कर लिया उन्हें आज हम सछूत शूद्र ( OBC ), जिन बौद्धों ने ब्राह्मण धर्म को स्वीकार नहीं किया उन्हें अछूत अतिशूद्र ( SC ) और जो बौद्ध अत्याचारों की वजह से जंगलो में रहने लगे उन्हें आज हम अवर्ण ( ST ) के रूप में पहचानते हैं ।

ब्राह्मण धर्म में वर्ण, वर्ण में जाति, जाति में उंच - नीच और ब्राह्मण के आगे सारे नीच, यही वजह हैं कि जब मुसलमानों का शासन आया तो बड़े पैमाने sc/st/obc के लोग मुसलमान बन गये, जब अंग्रेजो का राज आया तो क्रिस्चन बन गए ।

 आज भी sc/st/obc के लोगों को प्रांतवाद, जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद के नाम पर 'फूट डालो राज करो नीति' को अपनाकर भय, भक्ति, भाग्य, भगवान, स्वर्ग-नर्क, पाप-पूण्य, हवन, यज्ञ, चमत्कार, पाखण्ड अन्धविश्वास, कपोल काल्पनिक पोंगा पंथी कहानियां आदि अतार्किक, अवैज्ञानिक मकड़जाल को इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंटमीडिया के माध्यम से थोपकर तथा मुसलमानों का डर दिखा कर मानसिक रूप से गुलाम बनाया जा रहा हैं । ऐसे में यदि कोई जागरूक बुद्धिजीवी तर्क करता हैं तो उसे धर्म विरोधी बताकर बहिस्कृत कर दिया जाता हैं ।

आज बाबासाहब डा. भीमराव अम्बेड़करजी के संवैधानिक अधिकारों की वजह से अनार्य शूद्रों ( obc/sc/st ) ने हर क्षेत्र में कुछ तरक्की की है परन्तु आर्य ब्राह्मणों ने कांग्रेस/बीजेपी/AAP के राजनैतिक षडयंत्र में फंसाकर एक तरफ तो हिंदुत्व के नाम पर मुसलमानों से लड़ाने का प्रयास किया जा रहा हैं, दूसरी तरफ प्राईवेटाइजेशन, एसईझेड और भूमि अधिग्रहण के नाप पर आर्थिक रूप से तथा अंधविश्वास फैलाकर मानसिक रूप से गुलाम बनाने का षड्यंत्र किया जा रहा हैं ।
क्या आज अनार्य शूद्रों के पास आने वाली अंतहीन गुलामी से बचने की समझ और प्लान हैं ?



👇 एक मात्र उपाय

शूद्र ( obc ), अतिशूद्र ( sc/st )
जाति तोड़ो समाज जोड़ो...!

बहुजन समाज बनाओ
अल्पसंख्याक को मिलाओ...!!

अपनी ताकत दिखाओ
मनुवाद से मुक्ति पाओ...!!!

धन, धरती और साधन बांटो
बाद में आरक्षण बांटो...!

जिसकी जितनी संख्या भारी
उतनी उसकी हिस्सेदारी...!!

जय मूलनिवासी, बामण विदेशी...!!!!!
मनिष तांबे एक मूलनिवासी

संघ (RSS) परिवार के सभी सदस्यों को जानिये

*संघ (RSS) परिवार के सभी सदस्यों को जानिये:*

*आर.एस.एस.* अपना सांप्रदायिक रूप छिपाने के लिये अपने संगठनों के सामने भारतीय राष्ट्रीय जैसे शब्द लगाता है. देशद्रोही क्रिया-कलापों के लिये उस पर कई बार पाबंदियाँ लगाई गयी.

*1. भारतीय जनता पार्टी (1980) कार्य:* पहले जनसंघ था, अब भाजपा है. राजनैतिक क्षेत्र में ब्राहमणवादियों का वर्चस्व एवं प्रभाव बनाना. बहुजनों को उनके अधिकारों से वंचित रखने के लिये यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है. ओबीसी के मंडल आयोग के खिलाफ रामरथ यात्रा निकालकर ओबीसी के खिलाफ होने का प्रमाण दिया. सत्ता की चाबी हाथ में रखकर पूरे देश पर नियंत्रण रखने का मकसद, फिलहाल कुछ राज्यों में भाजपा की सत्ता है, अतः मकसद में कुछ पैमाने पर कामयाब.

*2. विश्व हिन्दू परिषद (1964) कार्य:* जातिवादी ब्राहमण धर्म का प्रचार प्रसार कर वर्णव्यवस्था का समर्थन करना, देश में जातीय दंगे भड़काना, राममंदिर निर्माण का बहाना बनाकर देश में अशांति फैलाना.

*3. भारतीय मजदूर संघ (1955) कार्य:* कामगार क्षेत्र में घुसकर मनुवादी प्रवृत्ति को जागृत करना, बहुजनों को गुमराह करना.

*4. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (1948) कार्य:* स्कूल एवं कालेज के छात्रों में जातिवाद की प्रवृत्ति जागृत कराना, मंडल आयोग एवं आरक्षण का विरोध करना.

*5. भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्य:* युवा पीढी को सांप्रदायिकता का प्रशिक्षण देकर बहुजनों के प्रति उनके मन में नफरत निर्माण करते रहना.

*6. दुर्गा वाहिनी कार्य:* कथित हाई कास्ट महिलाओं को हल्दी कुमकुम एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर संगठित कर मनुवाद के प्रचार प्रसार के लिये तैयार करना.

*7. राष्ट्रीय सेविका समिति (1936) कार्य:* सरकारी एवं चैरिटेबिल संस्थाओं का लाभ कथित हाईकास्ट की महिलाओं को पहुंचाना, देश सेवा के नाम पर मेवा खाना.

*8. वनवासी कल्याण संस्था (1972) कार्य:* आदिवासियों को गुमराह करके हिन्दुत्व के प्रभाव में रखना.

*9. राष्ट्रीय सिख संगत (1986) कार्य:* सिख धर्म के लोगों को हिन्दुत्व के प्रभाव में रखना.

*10. सामाजिक समरसता मंच कार्य:* सामाजिक समरसता की नौटंकी रचाकर बहुजनों में गुलामी की प्रवृत्ति को बढ़ाने का प्रयास करना.

*11. भारतीय किसान संघ (1977) कार्य:* किसानों की समस्याओं के लिये लड़ने का नाटक रचाकर उन्हें हिन्दुत्व की राह पर लाना.

*12. अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत कार्य:* संघ ने हर क्षेत्र के लोगों को संगठित किया है, यहां तक कि ग्राहक लोगों का भी संगठन तैयार किया है, अर्थात समस्याओं से उनका लेना देना नहीं. बस जातिवाद की भावना उनमें जागृत करना मुख्य मकसद है.

*13. सहकार भारती (1978) कार्य:* सहकार क्षेत्र में सांप्रदायकता एवं वर्णवाद की भावना प्रबल कर ब्राहमणों का वर्चस्व बनाना और कथित हाईकास्ट के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना.

*14. विद्या भारती (1977) कार्य:* शैक्षणिक क्षेत्र में ब्राहमणों का वर्चस्व रखना. संशोधन के नाम पर अध्ययन की किताबों में गलत इतिहास लिखना, ब्राहमणों को श्रेष्ठ बनाना, बहुजनों को बदनाम करना.

*15. भारतीय अध्यापक परिषद कार्य:* अध्यापक लोगों को मनुवादी संस्कार छात्रों पर डालने के लिये तैयार करना, शिक्षण क्षेत्र में ऐसे अध्यापक बहुजन छात्रों को जानबूझकर फेल करते हैं और उन्हें पिछड़ा रखते हैं.

*16. हिन्दू सेवक संघ कार्य:* हिन्दुत्व रक्षा के लिये कार्यकर्ताओं का दल तैयार करना.

*17. भारतीय सेवक संघ कार्य:* देशभक्ति के नाम पर सांप्रदायिकता का प्रचार प्रसार करना.

*18. सेवा समर्पण संस्था कार्य:* विविध बैरायटी संस्था रजिस्टर कर ग्रान्ट का मलिन्दा खाना.

*19. संस्कार भारती (1981) कार्य:* संघ शाखा शिविर द्वारा बच्चों के कच्चे मन पर वर्गवाद के संस्कार डालना. उनके मन में धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा आरक्षण के खिलाफ नफरत के बीज बोना.

*20. भारत भारती कार्य:* देश सेवा के नाम पर संघ की प्रसिद्धि करना, इमेज बनाना, फोटोग्राफर एवं वार्ताकार लेकर भूकम्प, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाना और थोड़ा काम करके ज्यादा पब्लिसिटी करना.

*21. भारतीय विकास परिषद कार्य:* समाजसेवा के नाम पर शासकीय योजनाओं का लाभ उठाना.

*22. इतिहास संकलन समिति कार्य:* इतिहास संशोधव के नाम पर गलत इतिहास लिखाना, ब्राहमणों के अपराध छुपाकर उनका गुणगौरव करना.

*23. राष्ट्रीय लेखक मंच कार्य:* ब्राहमणवादी लेखकों को संगठित कर ब्राहमणों के पक्ष में साहित्य निर्मित करना.

*24. विश्व संवाद केन्द्र कार्य:* विश्व के विविध देशों में रहने वाले हिन्दुओं को संगठित कर हिन्दुत्व को बढ़ावा देना.

*25. विश्व संस्कृत प्रतिष्ठान कार्य:* संस्कृत को देववाणी का दर्जा देकर उसका प्रचार प्रसार करना.

*26. भारतीय सैनिक परिषद (1992) कार्य:* फौज में ब्राहमणवाद को बढ़ावा देना जो देश की एकता के लिये महा खतरा है.

*27 भारतीय अधिवक्ता संघ*
वकीलों को संगठित कर हाईकास्ट के लोगों को बड़े-बड़े अपराधों से बचाना. दलित बहुजनों को छोटे-छोटे गुनाहों पर कड़ी सजा दिलवाना.

*28. राष्ट्रीय वैद्यकीय संघ कार्य:* कथित हाईकास्ट के डाक्टरों को संगठित कर संघ की विचारधारा का प्रचार प्रसार करना.

*29. भारतीय कुष्ठ रोग निवारण संघ कार्य:* भाजपा की वोट बैंक मजबूत करने के लिये कुष्ठ रोगियों तक को संगठित करना.

*30. दीन दयाल शोध संस्थान कार्य:* सामाजिक एवं आर्थिक नीतियों पर रिसर्च करने हेतु आने वाले शोधकर्ताओं में ब्राहमणवादी व्यवस्था का ध्यान रखना.

*31. स्वामी विवेकानन्द मिशन कार्य:* अध्यापन के क्षेत्र में भी हिन्दुत्व प्रणाली को मजबूत करने हेतु कार्यरत संस्था.

*32. महामना मालवीय मिशन कार्य:* सामाजिक कार्य के नाम पर सांप्रदायिकता के बीज बोना.

*33. बाबासाहेब आमटे स्मारक कार्य:* स्मारक के बैनर तले संघ की गतिविधियों को संचालित एवं मजबूत करना.

*34. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद कार्य:* अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर संघ की प्रतिभा उज्जवल करना.

*35. भारती अपना संघ कार्य:* संघ की गतिविधियों को संचालित करने हेतु रिसर्च करना.

*36. मीडिया कन्ट्रोल सेन्टर कार्य:* गोबेल्स प्रचार तंत्र से पेपर मीडिया एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर कार्य करना, कथित हाईकास्ट की प्रतिभा उज्जवल करना, Sc, st,ओबीसी तथा अल्पसंख्यक समाज के बारे में गलतफहमियों का निर्माण करना, उन्हें नालायक, हीन, नाकाबिल एवं गुणवत्ताहीन बताना.

Monday, October 17, 2016

सरकारी नौकरियों में आरक्षण हमेशा के लिये है

26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, जिसे 65 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इस दौरान विधिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके बावजूद भी सभी दलों की सरकारों और सभी राजनेताओं द्वारा लगातार यह झूठ बेचा जाता रहा कि अजा एवं अजजा वर्गों को सरकारी शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मिला आरक्षण शुरू में मात्र 10 वर्ष के लिये था, जिसे हर दस वर्ष बाद बढाया जाता रहा है। इस झूठ को अजा एवं अजजा के राजनेताओं द्वारा भी जमकर प्रचारित किया गया। जिसके पीछे अजा एवं अजजा को डराकर उनके वोट हासिल करने की घृणित और निन्दनीय राजनीति मुख्य वजह रही है। लेकिन इसके कारण अनारक्षित वर्ग के युवाओं के दिलोदिमांग में अजा एवं अजजा वर्ग के युवाओं के प्रति नफरत की भावना पैदा होती रही। उनके दिमांग में बिठा दिया गया कि जो आरक्षण केवल 10 वर्ष के लिये था, वह हर दस वर्ष बाद वोट के कारण बढाया जाता रहा है और इस कारण अजा एवं अजजा के लोग सवर्णों के हक का खा रहे हैं। इस वजह से सवर्ण और आरक्षित वर्गों के बीच मित्रता के बजाय शत्रुता का माहौल पनता रहा।
मुझे इस विषय में इस कारण से लिखने को मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि अजा एवं अजजा वर्गों को अभी से डराया जाना शुरू किया जा चुका है कि 2020 में सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिला आरक्षण अगले दस वर्ष के लिये बढाया नहीं गया तो अजा एवं अजजा के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाने वाला है।
जबकि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गयी है, उसके अनुसार सरकारी शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में अजा एवं अजजा वर्गों का आरक्षण स्थायी संवैधानिक व्यवस्था है। जिसे न तो कभी बढ़ाया गया और न ही कभी बढ़ाये जाने की जरूरत है, क्योंकि सरकारी नौकरी एवं सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिला हुआ आरक्षण अजा एवं अजजा वर्गों को मूल अधिकार के रूप में प्रदान किया गया है। मूल अधिकार संविधान के स्थायी एवं अभिन्न अंग होते हैं, न कि कुछ समय के लिये।
इस विषय से अनभिज्ञ पाठकों की जानकारी हेतु स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि भारतीय संविधान के भाग-3 के अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकार वर्णित हैं। मूल अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा होते हैं, जिन्हें किसी भी संविधान की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, जिनके बिना संविधान खड़ा नहीं रह सकता है। इन्हीं मूल अधिकारों में अनुच्छेद 15 (4) में सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये अजा एवं अजजा वर्गों के विद्यार्थियों के लिये आरक्षण की स्थायी व्यवस्था की गयी है और अनुच्छेद 16 (4) (4-क) एवं (4-ख) में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति एवं पदोन्नति के आरक्षण की स्थायी व्यवस्था की गयी है, जिसे न तो कभी बढ़ाया गया और न ही 2020 में यह समाप्त होने वाला है।

यह महत्वपूर्ण तथ्य बताना भी जरूरी है कि संविधान में मूल अधिकार के रूप में जो प्रावधान किये गये हैं, उसके पीछे संविधान निर्माताओं की देश के नागरिकों में समानता की व्यवस्था स्थापित करना मूल मकसद था, जबकि इसके विपरीत लोगों में लगातार यह भ्रम फैलाया जाता रहा है कि आरक्षण लोगों के बीच असमानता का असली कारण है।

सुप्रीम कोर्ट का साफ शब्दों में कहना है कि संविधान की मूल भावना यही है कि देश के सभी लोगों को कानून के समक्ष समान समझा जाये और सभी को कानून का समान संरक्षण प्रदान किया जाये, लेकिन समानता का अर्थ आँख बन्द करके सभी के साथ समान व्यवहार करना नहीं है, बल्कि समानता का मतलब है- एक समान लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये संविधान में वंचित वर्गों को वर्गीकृत करके उनके साथ एक समान व्यवहार किये जाने की पुख्ता व्यवस्था की गयी है। जिसके लिये समाज के वंचित लोगों को अजा, अजजा एवं अपिवर्ग के रूप में वर्गीकृत करके, उनके साथ समानता का व्यवहार किया जाना संविधान की भावना के अनुकूल एवं संविधान सम्मत है। इसी में सामाजिक न्याय की मूल भावना निहित है। आरक्षण को कुछ दुराग्रही लोग समानता के अधिकार का हनन बतलाकर समाज के मध्य अकारण ही वैमनस्यता का वातावरण निर्मित करते रहते हैं। वास्तव में ऐसे लोगों की सही जगह सभ्य समाज नहीं, बल्कि जेल की काल कोठरी और मानसिक चिकित्सालय हैं।
अब सवाल उठता है कि यदि अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की स्थायी व्यवस्था है तो संसद द्वारा हर 10 वर्ष बाद जो आरक्षण बढ़ाया जाता रहा है, वह क्या है?
इस सवाल के उत्तर में ही देश के राजनेताओं एवं राजनीति का कुरूप चेहरा छुपा हुआ है।
संविधान के अनुच्छेद 334 में यह व्यवस्था की गयी थी कि लोक सभा और विधानसभाओं में अजा एवं अजजा के प्रतिनिधियों को मिला आरक्षण 10 वर्ष बाद समाप्त हो जायेगा। इसलिये इसी आरक्षण को हर दस वर्ष बाद बढाया जाता रहा है, जिसका अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रदान किये गये आरक्षण से कोई दूर का भी वास्ता नहीं है। अजा एवं अजजा के कथित जनप्रतिनिधि इसी आरक्षण को बढाने को अजा एवं अजजा के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के आरक्षण से जोड़कर अपने वर्गों के लोगों का मूर्ख बनाते रहे हैं और इसी वजह से अनारक्षित वर्ग के लोगों में अजा एवं अजजा वर्ग के लोगों के प्रति हर दस वर्ष बाद नफरत का उफान देखा जाता रहा है। लेकिन इस सच को राजनेता उजागर नहीं करते।

हाँ, ये बात अलग है कि करीब-करीब हर विभाग, संस्थान, उपक्रम आदि में कई वर्षों से निजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम देकर अजा एवं अजजा के आरक्षण को रोकने की सफल कोशिश की जा रही है ।

अतः जरूरत है कि हम सभी इस जानकारी को अपने सभी लोगो तक पहुंचाने की कोशिश करे।

सवाल : आप अम्बेदकरवादी हैं ?

एक नकली ेडकरवादी व्यक्ति से सवाल
=====================
सवाल : आप अम्बेदकरवादी हैं ?
जवाब : हाँ, एकदम कट्टर अम्बेदकरवादी
**
सवाल : अम्बेदकरवादी होने के क्या प्रमाण हैं आपके पास?
जवाब : मेरे घर में बाबासाहब अंबेडकर जी की तस्वीरें हैं, उनकी किताबें हैं, मैं बाबासाहब अंबेडकर जी पर गाए हुए गाने सुनता हूँ, मेरे मोबाईल में सिर्फ़ और सिर्फ़ बाबासाहब अंबेडकर जी के जिवन पर गाए हुए गाने हैं, वाॅलपेपर हैं इतना ही नहीं मेरे मोबाईल का रिंगटोन भी बाबासाहब अंबेडकर जी पर गाया हुआ एक सुंदर सा गाना हैं।
***
सवाल : आप बाबासाहब अंबेडकर जी की जयंती मनाते हैं?
जवाब : यह भी कोई सवाल हुआ। अरे ...बाबासाहब अंबेडकर जी की जयंती तो हमारे लिए दिवाली और होली हैं। उस दिन गली गली में हम प्रोग्राम करते हैं, डिजे के साथ रैलियाँ निकालते हैं इतना ही नहीं उस दिन तो हम हमारी बस्तियों में खाना भी बाटते हैं।
***
सवाल : आप विहारों में जाते हैं?
जवाब : हाँ, रोज जाते हैं। आप कहें तो मैं आपको पुरी बुद्ध वंदना भी बता सकता हूँ।
**
आखिरी सवाल : चुनाव के वक्त मतदान किसे करते हैं।
जवाब : ???
**
सवाल : महाराष्ट्र में इतने कट्टर अंबेडकरवादी और बौद्ध होने के बावजूद भी महाराष्ट्र की सत्ता अंबेडकरवादी लोगों के हाथों में क्यों नहीं?
जवाब : ???
**
सवाल : नागपूर में इतने चिंतक, लेखक, वक्ता, बुद्धिजीवी, कट्टर अंबेडकरवादी, बौद्ध होने के बावजूद भी वहाँ से आपका एक भी विधायक या सांसद क्यों नहीं चुना जाता?
जवाब : ???
***
सवाल : आपके यहाँ कट्टर अंबेडकरवादी होते हुए भी आरएसएस का मुख्यालय वहाँ से खत्म क्यों नहीं हुआ?
जवाब : ????
***
सवाल : क्या आज भी आपके यहाँ नोट से वोट खरिदा जा सकता हैं?
जवाब : ????
**
🤔🤔🤔
....
आंसर जरूर दीजियेगा???
बस बहोत हो गया अब एक हो जाओ...अपनी ताकत दिखाओ...अपनी सत्ता लाओ...

🙏🏻जय भीम 🙏🏻                                🦁जय मूलनिवासी🦁                         🌿☝🏻नमो बुद्धाय☝🏻

नास्तिक सम्मेलन पर हिन्दुत्ववादीयों ने हमला किया

नास्तिक सम्मेलन पर हिन्दुत्ववादीयों ने हमला किया ၊

महिलाओं तक की पिटाई करी गई और उनके कपड़े फाड़ दिये गये ၊

हमला करने का कोई कारण नहीं था ၊

भारत के संविधान में हर नागरिक को अपनी आस्था की आज़ादी है ၊

किसी को हिन्दु विचार मे आस्था हो सकती है ,

किसी को मुस्लिम विचार मे आस्था हो सकती है ,

किसी को नास्तिक विचार पर आस्था हो सकती है ၊

किसी की आस्था के आधार पर भारत के नागरिक पर हमला नहीं किया जा सकता ၊

लेकिन हिंदुत्ववादियों ने हमला किया ၊

हिंदुत्ववादियों के हमले का मनोविज्ञान डरावना है ,

वे मानते हैं कि हम जो लोग नास्तिक बने हैं उनके नाम हिन्दुओं जैसे हैं ,

इसका अर्थ है हिन्दु लोग हिन्दु धर्म छोड़ रहे हैं ၊

यानी अगर कोई हिन्दु अगर नास्तिक बनता है तो यह हिन्दु धर्म का अपमान है ၊

दो दिन से हिन्दुत्ववादी हमें यही गालियां दे रहे हैं ,

और हम से कह रहे हैं कि दम है तो मुसलमानों को नास्तिक बना कर दिखाओ ,

इसका अर्थ साफ है ,

हिन्दुत्ववादी लोग हिन्दुओं के नास्तिक बनने को अपने धर्म का अपमान और हिन्दु धर्म के लिये चुनौती मान रहे हैं ၊

लेकिन उससे भी ज्यादा बड़ा खतरा सरकार का इस मामले में बदमाशी पूर्ण रवैय्या है ,

प्रशासन के एक बड़े अधिकारी ने नास्तिक सम्मेलन के कार्यकताओं से पूछा कि आप ये राष्ट्रविरोधी गतिविधियां क्यों कर रहे हैं ?

कार्यक्रम के कार्यकर्ता भौंचक रह गये ,

नास्तिक होना देशद्रोह कैसे हो गया ?

भगत सिंह नास्तिक थे , तो क्या भगत सिंह राष्ट्रद्रोही थे ?

क्या हिन्दुत्व ही राष्ट्रवाद है ?

इसका अर्थ है अब सरकार वैसा ही सोचती है जैसा संघ चाहता है ,

नास्तिक सम्मेलन पर आज का हमला संघ और सरकार ने मिल कर किया है ၊

यह हमला भगत सिंह पर संघ का हमला है ၊

आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं नें भगत सिंह की फांसी का मजाक बनाया था,

और भगत सिंह का अपमान किया था ၊

यह हमला देश के संविधान और लोकतन्त्र पर हमला है ၊

मतलब अब देश मे आपको वही सोचना पड़ेगा जो गुन्डा अमित शाह चाहता है ၊

अगर आप उस गुन्डे के अनुसार नहीं सोचेंगे ,

तो उसके गुन्डे आप पर , माहिलाओं पर , आपकी सभा पर, नाटक पर , फिल्म शो पर, हमला कर देंगे ၊

इस देश के लोगों को अब सोचना ही होगा ,

कि भारत के नागरिकों की स्वतन्त्रता और लोकतन्त्र को चन्द गुंडों द्वारा नष्ट करने को बर्दाश्त किया जा सकता है क्या ?

कबीर की अन्धविश्वास, पाखंड, भेदभाव, जातिप्रथा, हिन्दू, मुस्लिम पर करारी चोट

कबीर की अन्धविश्वास, पाखंड, भेदभाव, जातिप्रथा, हिन्दू, मुस्लिम पर करारी चोट !!©

” जो तूं ब्रह्मण , ब्राह्मणी का जाया !
आन बाट काहे नहीं आया !! ”
– कबीर
(अर्थ- अपने आप को ब्राह्मण होने पर गर्व करने वाले ज़रा यह तो बताओ की जो तुम अपने आप की महान कहते तो फिर तुम किसी अन्य रास्ते से जाँ तरीके से पैदा क्यों नहीं हुआ ? जिस रास्ते से हम सब पैदा हुए हैं, तुम भी उसी रास्ते से ही क्यों पैदा हुए है ?)
कोई आज यही बात बोलने की ‘हिम्मंत’ भी नहीं करता ओर कबीर सदियों पहले कह गए ।। हमे गर्व हैं की हम उस महान संत के अनुयाई हैं । ऐसे महान क्रांतिकारी संत को कोटी कोटि नमन !!!

 “लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार
पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार !!”
– कबीर
(अर्थ – आप जो भगवान् के नाम पर मंदिरों में दूध, दही, मख्कन, घी, तेल, सोना, चाँदी, हीरे, मोती, कपडे, वेज़- नॉनवेज़ , दारू-शारू, भाँग, मेकअप सामान, चिल्लर, चेक, केश इत्यादि माल जो चढाते हो, क्या वह बरोबर आपके भगवान् तक जा रहा है क्या ?? आपका यह माल कितना % भगवान् तक जाता है ? ओर कितना % बीच में ही गोल हो रहा है ? या फिर आपके भगवान तक आपके चड़ाए गए माल का कुछ भी नही पहुँचता ! अगर कुछ भी नही पहुँच रहा तो फिर घोटाला कहा हो रहा है ? ओर घोटाला कौन कर रहा है ? सदियों पहले दुनिया के इस सबसे बड़े घोटाले पर कबीर की नज़र पड़ी | कबीर ने बताया आप यह सारा माल ब्राह्मण पुजारी ले जाता है ,और भगवान् को कुछ नहीं मिलता, इसलिए मंदिरों में ब्राह्मणों को दान करना बंद करो )

#‎अन्धविश्वास_पर_कबीर_की_चोट‬ !!
‪#‎हिन्दुओ_पर‬
”पाथर पूजे हरी मिले,
तो मै पूजू पहाड़ !
घर की चक्की कोई न पूजे,
जाको पीस खाए संसार !!”
– कबीर
”मुंड मुड़या हरि मिलें ,सब कोई लेई मुड़ाय |
बार -बार के मुड़ते ,भेंड़ा न बैकुण्ठ जाय ||”
– कबीर
”माटी का एक नाग बनाके,
पुजे लोग लुगाया !
जिंदा नाग जब घर मे निकले,
ले लाठी धमकाया !!”
– कबीर
” जिंदा बाप कोई न पुजे, मरे बाद पुजवाये !
मुठ्ठी भर चावल लेके, कौवे को बाप बनाय !!
– कबीर
”हमने देखा एक अजूबा ,मुर्दा रोटी खाए ,
समझाने से समझत नहीं ,लात पड़े चिल्लाये !!”
– कबीर
‪#‎मुसलमानों_पर‬
”कांकर पाथर जोरि के ,मस्जिद लई चुनाय |
ता उपर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ||”
– कबीर
‪#‎हिन्दू_मुस्लिम_दोनों_पर‬
”हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।”
– कबीर
(अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।)

‪#‎हिन्दुओ_की_जाति_पर_कबीर_की_चोट‬
”जाति ना पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान !
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान !!
– कबीर
”काहे को कीजै पांडे छूत विचार।
छूत ही ते उपजा सब संसार ।।
हमरे कैसे लोहू तुम्हारे कैसे दूध।
तुम कैसे बाह्मन पांडे, हम कैसे सूद।।”
– कबीर
”कबीरा कुंआ एक हैं,
पानी भरैं अनेक ।
बर्तन में ही भेद है,
पानी सबमें एक ॥”
– कबीर
”एक क्ष ,एकै मल मुतर,
एक चाम ,एक गुदा ।
एक जोती से सब उतपना,
कौन बामन कौन शूद ”
– कबीर

‪#‎कबीर_की_सबको_सीख‬ ‪#‎बाकि_समझ_अपनी_अपनी‬

”जैसे तिल में तेल है,
ज्यों चकमक में आग I
तेरा साईं तुझमें है ,
तू जाग सके तो जाग II ”
– कबीर
मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे ,
मैं तो तेरे पास में।
ना मैं तीरथ में, ना मैं मुरत में,
ना एकांत निवास में ।
ना मंदिर में , ना मस्जिद में,
ना काबे , ना कैलाश में।।
ना मैं जप में, ना मैं तप में,
ना बरत ना उपवास में ।।।
ना मैं क्रिया करम में,
ना मैं जोग सन्यास में।।
खोजी हो तो तुरंत मिल जाऊ,
इक पल की तलाश में ।।
कहत कबीर सुनो भई साधू,
मैं तो तेरे पास में बन्दे…
मैं तो तेरे पास में…..
– कबीर

भूत वर्तमान भविष्य

भूत वर्तमान भविष्य (भाग -1)

Manusmriti के मुताबिक मानव जाति को उनके काम के हिसाब से 4 वर्णों में बांटा गया है। ये चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं। मनुस्मृति में ब्राह्मण को अवध्य बताया गया है यानी कितना भी बड़ा पाप किए जाने पर उसकी हत्या नहीं की जा सकती, जबकि शूद्र के लिए छोटे अपराधों पर भी मौत की सजा देने जैसे प्रावधान हैं।
मनुस्मृति में कितना भारी षड्यन्त्र है उसकी जानकारी श्लोकों में और पढ़ लीजिए।
यो लोभात् अधमो जात्या जीवेत् उत्कृष्ट कर्मभिः। तें राजा निर्धनं कृत्वा क्षिप्रमेव विवासयेत्॥ 10/96॥
अर्थात् जो शूद्र, अछूत या शिल्पी जीविका के लोभ से अच्छे कर्मों द्वारा अपने जीवन को बिताने लगे तो राजा इन सबका धन छीन ले और तुरन्त देश से निकाल देवें।
विप्रसेवैव शूद्रस्य विशिष्टं कर्म कीर्त्यते। यदतोऽन्यत् हि कुरुते तद् भवत्यस्य निष्फलम्॥10/123॥
यदि कुछ वेतन लेने की इच्छा हो तो क्षत्रिय या वैश्य की सेवा करके जीवन बिताले।
स्वगार्थं उभयार्थं वा विप्रान् आराधयेत्तु सः।  जात ब्राह्मण शब्दस्य सा ह्यहस्य कृतकृत्यता॥10/122॥
यदि स्वर्ग जाने की इच्छा हो तब तो बिना कुछ लिए ही ब्राह्मण की सेवा करे। यदि ‘ब्राह्मण के बन गए’ तो सारा जीवन ही सफल समझो।
उच्छिष्ट मन्नं दातव्यं जीर्णानि वसनानि च। पुलाकाश्चैव धान्यानां जीर्णाश्चैव परिच्छदाः॥10/125॥
शूद्र को झूठा अन्न, फटे कपड़े और बिछौने देना चाहिए; क्योंकि शूद्र को कोई पाप नहीं होता है।
न शूद्रे पातकं किंचित् न सः संस्कारमर्हति। नास्याधिकारो धर्मेऽस्ति-न धर्मात् प्रतिषेधनम्॥10/126॥
शूद्र के लिए कोई संस्कार नहीं है और उनको धर्म में कोई अधिकार नहीं है। हाँ! स्वधर्म अर्थात् सेवा करने का सर्वाधिकार प्राप्त है।
एक जातिः द्विजातींस्तु वाचा दारुणयाक्षिपन्। जिह्वाया प्राप्नुयात् छेदं जघन्य प्रभवोहिसः॥8/270॥
यदि शूद्र द्विजों को गाली देवे तो उसकी जीभ काट ली जाए, क्योंकि वह पैदायशी नीच है।
नामजातिग्रहं त्वेषां अभिद्रोहेण कुर्वतः।  निक्षेप्यो ऽयोमयः शंकुः ज्वलन्नास्ये दशांगुलः॥8/271॥
यदि द्विजों का नाम लेकर शूद्र यह कह बैठे कि ‘ब्राह्मण’ बना है तो उसके मुख में दस अंगुल की लोहे की शलाका जलती-जलती घुसेड़ देवे।
धर्मोपदेशं दर्पेण विप्राणा मस्य कुर्वतः। तप्त मासेचयेत् तैलं वक्त्रे श्रोत्रेच पार्थिवः॥8/272॥
यदि शूद्र ब्राह्मण को कोई धर्म की बात कह दे तो उसके मुख और कान में राजा खौलता हुवा गरम तेल डलवा दे। परमात्मा बचावे! हिन्दुओं के रामराज्य और स्वराज्य से। नहीं तो ये लोग अपनी मनुस्मृति के आधार पर सब कुछ करेंगे। इन्होंने क्या नहीं किया। सबसे बढ़िया कहे जाने वाले रामराज्य में शम्बूक नामक शूद्र का सिर सिर्फ़ इसलिए स्वयं आदर्श राजा राम ने काट दिया कि वह तप करता था, मुनि बनता था। यही है पुराना मनुस्मृति विधान ।

श्रुतं देशं च जातिं च कर्म शरीर मेव च। वितथेन ब्रुबन् दर्पात् दाप्यः स्यात् द्विशतं दमम्॥8/273॥
यदि कोई अपनी जात छिपावे, तो उससे दो सौ पण जुर्माना लिया जावे।
येन केन चित् अंगेन हिंस्यात् श्रेष्ठमन्त्यजः। छेत्तव्यं तत्तदेवास्य तन्मनो रनुशासनम्॥8/279॥
अन्त्यज (शूद्र और अछूत) जिस किसी अंग से द्विजों को मारे उसका वहीं अंग काट लिया जावे।
सहासनममि प्रेप्सुः उत्कृष्टस्यावकृष्टजः।  कट्या कृताङ्को निर्वास्यः स्फिचं वास्यावकर्त्तयेत्॥8/281॥
यदि अछूत द्विज के बराबर दूरी आदि पर बैठ जावे तो उसके चूतड़ पर गरम लोहे से दाग दे अथवा थोड़े चूतड़ ही कटवा दे।
अब्राह्मणः संग्रहणे प्राणान्तं दंडमर्हति। चतुर्णामपि वर्णानां दारा रचयतमा सदा॥8/359॥
यदि शूद्र किसी की स्त्री को भगा ले तो उसको फाँसी का दंड दिया जावे; क्योंकि चारों वर्णों की स्त्रियों की रक्षा कोशिश के साथ करनी चाहिए
कन्यां भजन्तीं उत्कृष्टां न किंचिदपि दापयेत्’॥8/365॥
परन्तु ब्राह्मण यदि किसी की स्त्री को भगाले तो जुर्माना तक न करे।
उत्तमांगोद्भवात् ज्यैष्ठयात् ब्रह्मणश्चैव धारणात्। सर्वस्यैवास्य सर्गस्य धर्मतो ब्राह्मणः प्रभुः॥1/93॥
मुख से पैदा होने के कारण ब्राह्मण सबसे बड़े हैं और सृष्टि के मालिक हैं।
यस्यास्येन सदाश्नन्ति हव्यानि त्रिदिवौकसः। कव्यानि चैव पितरः किं भूतमधिकं ततः॥1/95॥
देवता लोग ब्राह्मणों के मुख द्वारा ही भोजन करते हैं इस लिए संसार में ब्राह्मण से बढ़कर कोई प्राणी नहीं है।
सर्वस्वं ब्राह्मणस्येदं यत् किंचित् जगती गतम्। श्रेष्ठयेनाभिजने नेदं सर्वं वै ब्राह्मणोर्हति॥1/100॥
संसार में जो कुछ है सब ब्राह्मण का है, क्योंकि जन्म से ही वह सबसे श्रेष्ठ है।
स्वमेव ब्राह्मणो भुंक्तो स्वं वस्ते स्वं ददाति च। आनृशंस्यात् ब्राह्मणस्य भुंजते हीतरे जनाः॥1/101॥
ब्राह्मण जो कुछ भी खाता है, पहिनता और देता है सब अपना ही है। संसार के सब लोग ब्राह्मण की कृपा से ही खाते-पीते और लेते देते हैं।
बिदुषा ब्राह्मणोनेदं अध्येतव्यं प्रयत्नतः। शिष्येभ्यश्च प्रवक्तव्यं सम्यङ् नान्येन केनचित्॥1/103॥
विद्वान् ब्राह्मण को चाहिए कि इस मनुस्मृति शास्त्र को खूब प्रयत्न से पढ़े और ब्राह्मण को ही पढ़ावे।
अधीयीरन् त्रयो वर्णाः स्वकर्मस्था द्विजातयः। प्रब्रू यादू ब्राह्मणात्वेषां नेतराविति निश्चयः॥10/1॥
द्विजाति लोग विद्या पढ़ें। परन्तु पढ़ाने का काम ब्राह्मण ही करें। शूद्र पढ़ने न पावें।
एतान् द्विजातयो देशान् संश्रयेरन् प्रयत्नतः।  शूद्रस्तु यस्मिन् फस्मिन् वा निवसेत् वृत्तिकर्शितः॥2/24॥
इन ब्रह्मर्षि, आर्यावर्त्त आदि देशों पर द्विजाति लोग कोशिश करके अपना कब्जा करलें और शूद्र तो मुसीबत का मारा किसी कोने में पड़ा रहे।
ब्राह्मणो बैल्व पालशौ क्षत्रियो बाट खादिरौ। पैप्पलो दुम्बरौ वैश्यो दण्डान् अर्हन्ति धर्मतः॥2/45॥
द्विजाति लोग दण्ड धारण करें। शूद्र के लिए कोई आज्ञा नहीं। यह संस्कार विधि में भी है।
अब्रोह्मणादध्ययनं आपत्काले विधीयते।  नाब्राह्मणो गुरौ शिष्यो वासमात्यन्तिकं वसेत्॥2/242॥
क्षत्रिय आदि पढ़ाने की योग्यता भी रखते हों तो भी इनको पढ़ाने का काम न दे। इसके अनुसार आजकल स्कूलों में जितने गुप्ता, ठाकुर मास्टर या हेडमास्टर हैं, सब के सब बायकाट के योग्य हैं।

भूत वर्तमान भविष्य (भाग -2)

 बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने बड़े जतन से अमेरिका इंग्लैंड और जर्मनी में पढ़ कर खुद के परिवार की आहुति दे कर sc st obc और अल्पसंख्यकों को संवैधानिक अधिकार दिलाये। परंतु उन्होंने अपने छोटे छोटे स्वार्थों में फसकर अपने अधिकारों को बर्बाद कर दिया ।
सविधान संसोधन के लिए एक जरूरी शर्त है, लोकसभा और राज्यसभा में 2/3 बहुमत से किसी बिल का पास होना। साम दाम दंड RSS/BJP/MODI ने गुजरात का झूठा माँडल पैश कर लोकसभा में 2/3 से अधिक बहुमत प्राप्त कर लिया है, जबकि गुजरात सामाजिक विकास में देश का सबसे पिछड़ा राज्य है। अब RSS/BJP का पूरा ध्यान राज्यसभा में 2/3 बहुमत प्राप्त करने पर लगा हुआ है।
कुछ समय पूर्व RSS/BJP मनूस्मृति स्वर्ण अक्षरों में लिखवाने के लिए एक समीति को कार्य सोंप चुके है। जो दो वर्षों में पूरी तैयार होने का लक्ष्य रख्खा है। मंशा साफ है। समझने की जरूरत है। और अबतक कुछ कार्यों पर वो प्रयोग भी कर चुके है।
कल रात मुझे सपना आया कि 2017 में उत्तर प्रदेश में rss वाली bjp सरकार बन गई है। सरकार बनते ही सबसे पहले बीजेपी ने हमारे देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया है RSS/BJP लोकसभा में पहले ही 2/3 से अधिक बहुमत प्राप्त कर चुके हैं । 70 साल से RSS/BJP यही सपना देख रही थी कि कैसे साम दाम दंड भेद डां अम्बेडकर के बनाए चक्रव्यूह को तोड़ा जाए, जिसके लिए लोकसभा और राज्यसभा में 2/3 बहुमत प्राप्त करना जरूरी था।
लोकसभा और राज्यसभा में 2/3 बहुमत प्राप्त करते ही सबसे पहले RSS/BJP ने धर्म निरपेक्ष राष्ट्र भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का बिल संसद से पास करवा दिया है।
उसके कुछ समय पश्चात ही उन्होंने सभी अल्पसंख्यको विशेष कर मुस्लिमों के सारे अधिकार राशन कार्ड नौकरी शादी के पास करवा कर समाप्त कर दिए हैं । उससे अगले दिन पुलिस की मनूवादी सगंठनों द्वारा बनाये गये मानसिक गुलामों की मदद से मुस्लिमों पर अत्याचार शुरु कर दिए हैं। उन्हें देश छोड़कर जाने के लिए विवश कर दिया है, कितने मुस्लिम अपने बीवी बच्चों सहित मार डाले गए हैं जो बचे हैं उन्हें गुलाम बनाकर मजदूरी करने के लिए विवश कर दिया है। गोधराकांड पूरे देश में दोहराया जा रहे हैं जगह-जगह आगजनी और बलात्कार बढ़ गए हैं हिंदू राष्ट्र घोषित होने के बाद मुस्लिमों के नागरिक अधिकार समाप्त होने से उनकी सुनने वाला कोई नहीं रहा है।
कुछ समय पश्चात ही मनुस्मृति को संविधान के रूप में मान्यता दिलाने का बिल संसद में पास करवा दिया गया है। मनुस्मृति को संविधान की मान्यता मिलते ही पूरे देश भर में आरक्षण से नौकरी पाए सभी ( Sc,St,Obc & minority) लोगों को बेइज्जत कर नौकरी से बाहर निकाल दिया है। बाबासाहेब के दिलाये अधिकारों से नौकरी पाने के बाद शूद्रों (sc st obc और मलेच्छों) ने जो धन-संपत्ति इकट्ठा की थी उसे छीन लिया गया है। उन्हें उनके  मकानों से बाहर निकाल दिया है ।
उससे अगले ही दिन शूद्रों(sc,st,obc) को मनु विधान के अनुसार कार्यों का निर्धारण कर दिया गया है ।
जाटव/चमार को मरे जानवरों की खाल निकालने का काम दे दिया गया है। वो लोग उन जानवरों की खाल निकालकर और मांस काटकर अपने बीवी बच्चों और मां बाप के लिए अपने कपड़े में बांधकर ला रहे हैं।
दिवाकर/धोबी ब्राह्मण, क्षत्रियों और वैश्य व्यक्तियों के कपड़े धोने के लिए इकट्ठा कर रहे हैं, और अपने बीवी बच्चों सहित सभी मिलकर कपड़े धुलकर प्रेस करके घर घर पहुंचा रहे हैं । और बदले में उन्हें जो रूखी सूखी रोटी मिल रही है उसी से काम चला रहे हैं
प्रजापति/कुम्हार समुदाय सुबह सुबह अपने गधों को लेकर मिट्टी लेने जा रहे हैं और दिन में पानी  डाल कर मकर कुल्हड़ सुराही आदि बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
यादव/अहीर समाज के लोग अब मनुस्मृति के अनुसार पूर्व मै किये कार्यो अर्थार्त भेस और गाय चराने को सुबह ही निकल जाते है उनकी धर की महिलाये पशुओं के गोवर के उपले बनाकर और अन्य साफ सफाई करके अपना और आपने बच्चों के पेट भर रहे हैं उनके पशुओ का धी दूध सुबह शाम क्षत्रिय समुदाय के लठेत आकर मुफ्त ही ले जाते हैं।
शाक्य/काँछी मनूवादी स्वर्ण समुदाय के लिए साग सब्जी उगाने में लगे हुए हैं। और सुबह शाम ताजा सब्जी उनके घर पहुचा रहे हैं।
कठेरिया समाज और अन्य समाज के सभी लोग उनको बांटे गये अपने-अपने कामों में व्यस्त हैं इसी तरह 6743  जातियों में बटी शूद्र (sc st obc) जातियां मनुस्मृति अनुसार मिले कामों में व्यस्त हैं।
और मुख्य बात यह है कि अब कोई कृष्ण, राम, देवी आदि 33 करोड़ देवी देवताओं मे से एक भी उनकी मद्द को नहीं आ रहा है। वो दिन रात एक ही चिथड़े में गुजार देते है। उनके बीबी बच्चे फ़टी पुरानी साड़ी से बने कपड़ो में जीवन गुजार रहे है ।

यह सब उनकी उस धूर्त्ता का परिणाम है उन्हें जो आरक्षण नोकरी शिक्षा और समान नागरिक अधिकारों को दिलाने वाले बाबा साहब अम्बेडकर को भुला देने के कारण हुआ, परन्तु अब क्या हो सकता हैं। सब कुछ समाप्त हो चुका है। आज बैठ कर यह सोचने से क्या होगा, क़ि कभी अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर    (मायावती जी) ने बाबा साहब का झड़ा बुलद करने बीडा उठाया था। लेकिन शूद्र समाज (sc;st;obc) और मुस्लिमो ने अपने छोटे छोटे स्वार्थों की वजह से अन्य पार्टीयो के भिन्न भिन्न प्रकार से लालच में फसकर बाबा साहब द्वारा दिलाऐ अपने वोट रूपी हथियार को व्यर्थ ही गवां दिया।
परन्तु अब बैठकर रोने से क्या हो सकता हैं। तभी मेरे कानो में जय भीम के नारों की आवाज सुनाई देती है और मैं नींद से जाग उठता हूँ देखता हूँ कि कुछ नौजवान भीम दूत तेजी से आगे बढे चाले आ रहे हैं  मैने आँख खोली ओह मैं स्वप्न देख रहा था कितना भयानक स्वप्न था। अभी समय है चुनाव होने में, मैं लोगों को आज से ही समझाने का कार्य दिन रात शुरु करता हूं  और अपने मुस्लिम और अन्य शूद्र(SC ST OBC) भाईयो को बाबा साहब और उनके विचारों पर चल रही एक मात्र पार्टी बहुजन समाज के अस्तित्व व संविधान की रक्षक , सर्वसमाज में भाई चारा पैदा करने वाली वन मैन  वन वोट वन वैल्यू के सिसिद्धांत को वास्तविक रूप में परिणित करने वाली बहुजन समाज पार्टी को वोट देने की अपील करूंगा

         जय भीम \ जय भारत